गंगा में नहाने आए हैं
मैया के दीवाने आए हैं
दिल में हैं उमंगे बड़ी बड़ी
धूप दीपक जलाने आए हैं
तीरथ पावन है प्रयागराज
गंगा यमुना सरस्वती के
संगम में हम
डुबकी लगाने आए हैं
एक हररियाली एक धवल धार
गंगा यमुना सरस्वती को
हम दुग्ध पुष्प और दीपदान कर
अपना जीवन बनाने आए हैं
तीरथ प्रयाग के कोतवाल
गंगा मैया पखारे जिनके चरण
बड़े बजरंगबली के पावन चरणों में
हम माथा झुकाने आए हैं