हां,ऐसा हो सकता है
क्यों नहीं हो सकता?
ये ब्रह्माण्ड
कभी नहीं बना
ये ना तो कहीं से आरंभ होता है
ना कहीं खत्म
इसके लिए समय शब्द अर्थहीन है
क्यों कि इसपर समय
कोई छाप नहीं छोड़ता
इसका ना कोई कर्ता है
ना ही ये किसी की कृति है
ये अनंत सर्वकालिक सर्वव्यापी है अथाह और अपरिमित
ऊर्जा का श्रोत जिससे
सबकुछ संचालित है
ब्रह्माण्ड में अनंत ग्रह, नक्षत्र, तारे
आकाश गंगाएं
इस धरती जैसी कितनी धरती
उन पर ऐसे ही कितने जीवन
पलते होंगे जैसे -
इस धरती पर
जिसपर हम रहते हैं ।
हां, ऐसा हो सकता है
क्यों नहीं हो सकता?
ये अनंत अथाह और अपरिमित
ब्रह्माण्ड एक धरती
एक आसमान एक सूरज एक चांद एक धरती पर कुछ लोग वनस्पतियां और ये सौंदर्य की रचना करके , क्या रुक गया होगा?
मनुष्य का मन मस्तिष्क और उसकी शक्तियां इतनी कैसे हो सकती है जो
इस तिलिस्म को समझ जाए?
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