कभी कोई सूरज चमकीला
कभी कोई दिन चटकीला
कभी कोई शाम दीवानी
कभी कोई चांदनी शर्मीली
कोई बादल कभीआवारा
कोई बारिश कभी मतवाली सी
कोई हवा का झोंका नटखट सा
जुल्फों में उलझ कर भटक गया
कभी कोई भंवरा फूलों में जाकर
रंग सुगंध में बहक गया
आंखों में नींद ना आई तब
कुछ सपने अपने होने लगे
कोई दिन ऐसे होते हैं
कुछ बातें ऐसी होती हैं.....