Friday 10 2025

कविता: जब कोई बद हवासी में जीता है ------

 


कविता: जब कोई बदहवासी में जीता है

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जब कोई बदहवासी में जीता है

जिंदगी जो अमृत है 

बना के जहर 

उसको घूंट घूंट पीता है जब कोई बदहवासी में जीता है 

ये दुनिया एक सराय है हम सभी मुसाफिर हैं वह इसे घर समझता है जो छूटे तो वही 

जार जार होता है 

जब कोई बदहवासी में जीता है

 यह रेल का सफर 

मुसल सल है

 हम सभी मुसाफिर हैं हर मुसाफिर को समझकर अपना 

लिपट लिपट के रोता है जब कोई बदहवासी में जीता है 

जिंदगी के लिए सब जरुरी है 

इसलिए सब ले आए फिर सबसे ऊब गए 

सब कुछ छोड़ आए

 हर बार कुछ छोड़ा कुछ रीता है 

जब कोई बदहवासी में जीता है।।।।।

उसकी बात करता हूं

 मैं उसकी बात करता हूं  -------------------------------- वो एक पल जो तमाम उम्र के बाद शेष है  मैं उसी पल की बात करता हूं, मैं तुम्हारी हमारी...