Monday 06 2026

जिंदगी की सहर

 एक रात की सहर होते होते हो गई 

जिंदगी की सहर

एक मां थी उस पर हो गई जिंदगी की मेहर

रोते-रोते सो गई उसकी याद में वो नहीं आया 

कितना घना था ओ खुदाया उस पर गमों का साया

सियाह चेहरे पे एक मुकम्मल किस्सा था यूं नुमाया

गोया उसकी याद में लिपट कर रोई थी ज़ार ज़ार

जो गुज़र गई ज़िन्दगी न लौटी, दी सदाएं बार बार 

उसका चेहरा था ज़ेहन ओ दिल में 

मुस्कुराता था

एक आरी थी उसका जिस्म था और वो चलाता था

यूं कोई बुरा ख्वाब था कभी आता था चला जाता था

कभी बांहों में लिपट जाता, आता था मुस्कुराता था 

ऐसी कोई रात थी, मां थी, यादें थी वो सब आईं

 मां के बेचैन कानों में बेटा आया ये खबर ना आई !

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