यूं रात रात भर
जाग जाग कर
करवटें बदल बदल कर
जाने क्या बिसूरते रहते हो
कभी मुझसे कहो
मैं घर हूं तुम्हारा
अपनी छत और दीवारों में
खिड़कियों पर्दों में
तुम्हारे लिए
मैंने बचा के रखी हैं
सब से गहरी नींदें
चैन- ओ- सुकून
तुम सब ले लो और
सो जाओ
एक गहरी नींद
जिसमें सपनों को भी
आने की इजाज़त न हो
मैं तुम्हें ऐसे अपने पहलू में
देखना चाहता हूं
आराम की नींद
सोते हुए
मैं घर हूं तुम्हारा
यूं रात रात भर
जाग जाग कर
करवटें बदल बदल कर
जाने क्या बिसूरते रहते हो
मुझे अच्छा नहीं लगता
मैं घर हूं तुम्हारा
कभी मुझसे भी बातें करो
यूं तो मैं बहुत खुश हूं
तुम्हारे बच्चो की किलकारियों में
तुम्हारी पत्नी की छनकती पायलों में
उनके हाथ से बने
पकवानों में
मैं दिन भर के किस्से
तुम्हारे बच्चो के खेल,
शैतानियां,
तुम्हारी मालकिन की
प्यार भरी डांट डपट
मनुहार और प्यार
बहुत कुछ तुमसे
बताना चाहता हूं
तुम कभी मेरी तरफ
देखो, मुझसे बातें करो
तुम्हें मैं बहुत कुछ बताना चाहता हूं
मेरे पास तुम्हारे लिए
बहुत सी मुस्कान और
ठहाके हैं
तुम्हारी ही अमानत हैं
तुम्हें ही लौटाना चाहता हूं
कभी तुम मुझे एक नजर
देख लिया करो
मेरे जिस्म के कोने कोने में
दर्ज हैं तुम्हारे बच्चों की
बदमाशियां
तुम्हारी पत्नी के हाथों के
कोमल स्पर्श
मैं वो सब भी तुम्हें देना चाहता हूं
मैं घर हूं तुम्हारा
तुम्हारे लिए मैंने
बचाकर रखी हैं
निरापद सुरक्षा
कभी मेरी तरफ देखो
मुझसे बातें करो
तुम्हें मैं अपने आगोश
में ले कर
तुम्हारा सब कुछ तुम्हें लौटाना चाहता हूं
मैं घर हूं तुम्हारा!