Monday 06 2026

मन

 मन

दुनिया की मुश्किलों से हारा

एक बेचैन परिंदा है 

जिसे सुख कहते हैं 

उसे ढूंढता 

हर शय में उसे ही देखता 

ये नहीं, वो नहीं 

नहीं नहीं इनमें से 

कोई नहीं 

कल ही अच्छा था 

अब आजकल तो 

कुछ भी अच्छा नहीं लगता 

हां, हो सकता है 

आने वाले दिन अच्छे हों

इन्हीं जोड़ जुगत में 

सब से सुनहरा आज का

दिन भी हाथों से 

ये फिसला, वो गया

वो आज के सूरज की पहली पहली किरण 

सोना बरसाती हुई निकल गई 

हवाएं महका कर चली गई पूरी कायनात 

पंछियों ने उसका स्तुतिगान गाया

सबने अपने अपने हिस्से का सुख पाया 

एक हमारा मन

दुनिया की मुश्किलों से हारा

एक बेचैन परिंदा है 

ढूंढता ही रहा उसे

सुख कहते हैं जिसे

वो कहीं न मिला

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