मशहूर अभिनेत्री तब्बू ने कई तमिल, तेलुगू, मलयालम, बंगला भाषा एवं हिंदी फिल्मों में मुख्य रूप से अभिनय किया है। साथ ही उन्होंने एक अमरीकी फिल्म में भी काम किया है। उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है एवं उन्हें सबसे अधिक बार सर्वश्रेष्ठ महिला कलाकार की श्रेणी में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड हासिल है। उन्होंने यह अवार्ड लगातार चार बार, जीता है। आज हम फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट के फिल्मी बातों के अंतर्गत तब्बू के जीवन और उनके फिल्मी करियर के बारे में बात करेंगे।
स्वीकार कीजिए सीमा शाही का
नमस्कार।
दोस्तों,
तब्बू का पूरा नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है और इनका जन्म 4 नवम्बर 1970 को हैदराबाद में हुआ। इनके पिता का नाम जमाल हाशमी व माता का नाम रिजवाना है।
कुछ अपवादों के बावजूद, तब्बू मुख्यतः कलात्मक एवं कम बजट फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर आंकड़े जुटाने की बजाय कहीं अधिक आलोचनात्मक सराहना जुटाती हैं। व्यावसायिक तौर पर सफल फिल्मों में उनकी उपस्थिति कम ही रही है और ऐसी फिल्मों में उनकी भूमिका भी बहुत छोटी रही हैं। मसलन-बॉर्डर , साजन चले ससुराल , बीवी नंबर वन, हम साथ साथ हैं आदि फ़िल्में हैं। वर्ष 1996 में बनी फिल्म माचिस , 1997 में बनी फिल्म विरासत , 1997 की हु तू तू ,1999 की अस्तित्व ,2000 मैं बनी चांदनी बार वर्ष 2001 में बनी मक़बूल फिर चीनी कम और 2024 में आई फिल्म crew में उन्होंने उल्लेखनीय अभिनय किया है। मीरा नायर की अमेरिकी फिल्म 'द नेमसेक ' में भी उनकी मुख्य भूमिका को काफी प्रशंसा मिली। अपनी फिल्मों एवं भूमिकाओं के मामले में काफी चुनिन्दा मानी जाने वाली इस अभिनेत्री का कहना है कि 'मैं वही फ़िल्में करती हूं, जो मुझे भावुक बना दे एवं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि फिल्म की यूनिट एवं निर्देशक मुझे प्रभावित करने चाहिए।
उनके जन्म के तुरंत बाद ही उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया। उनकी मां एक स्कूल अध्यापिका थीं एवं उनके नाना सेवा-निवृत्त प्राध्यापक थे जो एक स्कूल चलाते थे। नानी अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद के सेंट एन्स हाई स्कूल में की। 1983 में तब्बू मुंबई चली गयी एवं उन्होनें दो वर्षों तक वहां के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की।
वे शबाना आज़मी की भतीजी एवं अभिनेत्री फरहा नाज़ की छोटी बहन हैं। उनके घर मुंबई एवं हैदराबाद दोनों जगहों पर हैं।
तबस्सुम 'तब्बू' हाशमी ने अपने करियर की शुरुआत पंद्रह साल की उम्र में 1985 'हम नौजवान ' फिल्म से की. इस फिल्म में उन्होंने एक दुष्कर्म पीड़िता का किरदार निभाया था । देव साहब ने ही फिल्मों के लिए इन्हे तब्बू नाम दिया। एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली भूमिका एक तेलुगू फिल्म, कुली नंबर 1 में थी। दिसम्बर 1987 में, बोनी कपूर ने अपनी दो बड़ी फिल्मों, रूप की रानी चोरों का राजा एवं प्रेम, की शुरुआत की. प्रेम में तब्बू को संजय कपूर के साथ लिया गया। यह फिल्म आठ साल में बनकर तैयार हुई। तब्बू ने एक बार मजाक में कहा "मुझे इस दशक का, सबसे ज्यादा इंतज़ार करने वाली नयी अभिनेत्री का अवॉर्ड मिलना चाहिए." मुख्य किरदार के रूप में हिंदी में उनकी पहली रिलीज़ हुई फिल्म थी पहला पहला प्यार, जो लोगों का ज़रा भी ध्यान आकर्षित नहीं कर पाई. वर्ष 1994 में विजयपथ में अजय देवगन के साथ उनकी भूमिका के बाद वे प्रतिष्ठित हुईं। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला नवागंतुक अवॉर्ड हासिल हुआ। इसके बाद भी उनकी कई फ़िल्में आयीं, जो बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पायीं.
तब्बू ने अजय देवगन के साथ पांच फिल्में की है जिनमें विजयपथ, हकीकत, तक्षक, दृश्यम्, गोलमाल अगेन । उन्होंने अजय के साथ नेटफ्लिक्स पर रिलीज फिल्म एक सूटेबल बाय मैं भी अभिनय किया है। व्यक्तिगत जीवन में अविवाहित हैं और कहती हैं कि मैं अजय देवगन के कारण सिंगल हूं। फिल्मी गॉसिप के हिसाब से तब्बू अजय से कहती हैं कि तुम मेरे लिए लड़का ढूंढो। तब्बू बताती हैं कि जब भी मैं किसी अन्य एक्टर से बात करती थी तो अजय अक्सर उसको पीट देते थे। तब्बू कहती हैं कि हो सकता है अजय को मेरे सिंगल रहने का मलाल भी हो।
बहरहाल, कही सुनी बातों से अलग उनके करियर की सफलता दूसरी कहानी कहती है। वर्ष1996 में, तब्बू की आठ फ़िल्में रिलीज़ हुईं. इनमें से दो फ़िल्में, साजन चले ससुराल एवं जीत काफी सफल रहीं; दोनों ने ही उस साल की टॉप पांच फिल्मों में जगह बना ली. उनकी एक अन्य महत्वपूर्ण फिल्म माचिस समीक्षकों द्वारा काफी सराही गयी थी। इस फिल्म में, सिक्ख आतंकवाद के उदय के समय पकड़ी जाने वाली एक पंजाबी महिला की उनकी भूमिका को बहुत सराहना मिली एवं उन्हें सर्वश्रष्ठ अभिनेत्री का अपना पहला राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड मिला.
1997 में रिलीज़ होने वाली उनकी पहली फिल्म थी बॉर्डर . यह फिल्म 1997 के भारत-पाक युद्ध के दौरान लोंगेवाला की लड़ाई से जुड़ी जीवन की सच्ची घटनाओं के बारे में थी। उन्होनें इस फिल्म में सन्नी देवल की पत्नी की भूमिका निभाई थी। उनकी भूमिका इस फिल्म में छोटी थी, लेकिन यह फिल्म 1997 की सबसे बड़ी हिट बनी. उसी वर्ष, उन्होंने समीक्षकों द्वारा सराही गयी फिल्म विरासत में भी भूमिका निभाई. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही; तब्बू को अपने अभिनय के लिए फिल्मफेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला।
1999 में उन्होंने दो सफल बहु-अभिनीत फिल्मों, बीवी नंबर 1 एवं हम साथ साथ हैं, में अभिनय किया। दोनों फ़िल्में उस वर्ष की क्रमशः पहली और दूसरी सबसे बड़ी हिट फ़िल्में रहीं.
सन् 2000 में, अभिनेत्री ने हेराफेरी और अस्तित्व में अभिनय किया। इनमें से पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही, जबकि दूसरी समीक्षकों द्वारा सराही गयी। उन्हें अस्तित्व के लिए, सर्वश्रेष्ठ अभिनय का अपना तीसरा फिल्म फेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला।
2001 में उन्हें मधुर भंडारकर निर्देशित फिल्म "चांदनी बार" में देखा गया। एक बार-डांसर के उनके चित्रण को एक सिरे से सभी ने सराहा एवं अपने अभिनय के लिए उन्होनें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड जीता। समीक्षक तरण आदर्श के शब्दों में, "चांदनी बार पूरी तरह से तब्बू की फिल्म है और इसमें कोई दो राय नहीं." उनका अभिनय सबसे अधिक अंकों एवं सभी अवॉर्डों का हक़दार है। उनका काम दोषरहित है एवं उनके चरित्र का जो असर दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग़ पर पड़ता है वह उनके चरित्र रूपायन की क्षमता के कारण ही है।
उन्होंने कई तेलुगू फिल्मों में काम किया है, जिनमें से बहुत सी तो काफी सफल थी, मसलन - कुली नंबर 1 एवं निन्ने पेल्लादुत्था. इनमें से दूसरी तो उनकी सबसे अधिक प्रसिद्द व मशहूर फिल्मों में से एक है।
2003 में तब्बू ने विलियम शेक्सपियर की मैकबेथ पर आधारित एक फिल्म में अभिनय किया। इसमें इस अभिनेत्री ने लेडी मैकबेथ के चरित्र पर आधारित 'निम्मी' का किरदार निभाया। मक़बूल नाम की यह फिल्म विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित थी एवं इसे 2003 में टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। यूं तो मक़बूल बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन इसे भरपूर प्रशंसा मिली। इसमें तब्बू के अभिनय को बहुत सराहना मिली। एक समीक्षक ने कहा, "तब्बू एक जटिल किरदार में अद्भुत नज़र आयीं. इस फिल्म में उनका प्रदर्शन अवॉर्ड के लायक है। चांदनी बार के बाद यह ऐसा दूसरा किरदार है, जिसके लिए उन्हें लम्बे समय तक याद किया जायेगा।"
वे फ़ना (2006) में आमिर खान और काजोल के साथ सहायक भूमिका में थीं। यह फिल्म उस वर्ष की चौथी सबसे बड़ी हिट बनी।
सन् 2007 में, तब्बू ने अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म, मीरा नायर निर्देशित 'द नेमसेक ' में अभिनय किया। यह फिल्म विदेशों में बड़ी हिट हुई. उन्होंने चीनी कम में भी अभिनय किया, जिसमें उन्होंनें एक 34 साल की महिला की भूमिका निभाई जिसे, अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत, एक 64 वर्षीय आदमी से प्यार हो जाता है। इस फिल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। तरण आदर्श ने कहा 'तब्बू अपने दुर्जेय सह-अभिनेता की हावी हो जाने लायक उपस्थिति के बावजूद अपनी पहचान बना लेती हैं। वे उत्कृष्ट हैं। हालांकि यह फिल्म देश के भीतर खूब नहीं चली, लेकिन इसने विदेशों में, ख़ास तौर पर ब्रिटेन और अमेरिका में, अच्छा प्रदर्शन किया।
वर्ष 2009 की उनकी शुरुआत वोग इंडिया के जनवरी 2009 अंक के कवर पर छापे जाने से हुई।
एशियाई फिल्म एवं टेलीविज़न अकादमी के अंतर्राष्ट्रीय क्लब, नोयडा की आजीवन सदस्य हैं।
1998 में, हम साथ साथ हैं की शूटिंग के दौरान उनपर अपने सह-कलाकारों सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे एवं नीलम के साथ कांकणी में दो काले हिरण के शिकार का आरोप लगा था ये आरोप जल्दी ही हटा लिए गए एवं तब्बू को इन आरोपों से बरी कर दिया गया।
तब्बू अभी भी फिल्मी करियर में सक्रिय है और उम्मीद की जानी चाहिए कि वह सिनेमा जगत को अपने बेहतरीन अभिनय से समृद्ध करती रहेगी।
यह था फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट का आज का फिल्मी बातें। आपको यह कार्यक्रम कैसा लगता है यह हमें कमेंट करके बताइएगा और हमारे चैनल को सब्सक्राइब भी करिएगा। अब चलने का वक्त है, सीमा शाही को दीजिए इजाजत।
आप सभी को
मेरा प्यार भरा
नमस्कार।