Sunday 01 2024

आए दिन बहार के

 

फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की प्रस्तुति फिल्मी बातें

कार्यक्रम को लेकर हाजिर हूं मैं आपकी दोस्त सीमा शाही।


दोस्तों नमस्कार,

कोई एक फिल्म जिसमें सात गाने, सातों में से सभी सुपरहिट, एक गाना ठीक ठीक और.... अगर वह फिल्म पाक़ीज़ा, मुग़ल-ए-आज़म या उमराव जान नहीं है तो फिर कई और फिल्मों के नाम लिए जा सकते हैं। लेकिन सबसे ऊपर जो नाम होगा उसके बारे में आप भी सोचिए और अभी मैं बताती हूं कि मैं आज किस फिल्म के बारे में आपसे बात करने वाली हूं। रेडियो श्रोताओं के पसंदीदा कार्यक्रम में मेरी जानकारी के अनुसार कई साल तक हर बार सबसे ज्यादा फरमाइश जिस फिल्म के गानों की आती रही है वो फिल्म भी इसमें शुमार है। अब सवाल है कि वह गाने कौन से हैं तो उसमें से एक गाना है जिसे लता मंगेशकर ने गया है "सुनो सजना पपीहे ने कहा है ये पुकार के" अगला गाना है "मेरा महबूब है बेमिसाल" यह लता मंगेशकर की आवाज में ।

जिसको लता मंगेशकर और महेंद्र कपूर ने गया है "ये कली फूल बनकर जब तक खिले इंतजार.. इंतजार करो" फिर अगला गाना आशा भोसले की आवाज "खत लिख दे सांवरिया के नाम बाबू" फिर मोहम्मद रफी साहब का गाया गाना "मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे" और हां , सबसे ऊपर वह गाना जिसे लता मंगेशकर और आशा भोंसले दोनों ने गाया है "ऐ काश किसी दीवाने को हमसे भी मोहब्बत हो जाए" ।

 अब आपको समझ में आ ही गया होगा कि मैं आपसे जिस फिल्म के बारे में बात कर रही हूं उसका नाम है "आए दिन बहार के।"

 जी हां दोस्तों, यह एक ऐसी म्यूजिकल सुपरहिट फिल्म है जिसके गाने जब-जब रेडियो पर बजते हैं तब तब हम यूट्यूब पर सर्च करके उस गाने को दोबारा सुनते हैं ।ऐसी इन गानों की लत है कि आप इनसे बच नहीं सकते ।अब चलिए इन सुपरहिट गानों की फिल्म के बारे में कुछ और भी बातें करते हैं । बड़ी उत्सुकता होगी आपको कि इतने सुपरहिट गीत लिखने वाले गीतकार का नाम क्या है तो मैं आपको बता दूं कि इस फिल्म के सारे गाने आनंद बक्शी जी ने लिखे हैं और आनंद बक्शी जी की जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ खूब जमी है । और इसी जोड़ी ने उनके गानों को संगीत बद्ध किया है फिल्म आए दिन बहार के लिए। फिल्म में जिन कलाकारों ने भाग लिया उसमें धर्मेंद्र आशा पारेख , बलराज साहनी, नजमा, राजेंद्र नाथ मुख्य कलाकार रहे हैं। यह फिल्म वर्ष 1966 में 6 ओम प्रकाश ने बनाया।

फिल्म आए दिन बहार के फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है कि

 रवि एक योग्य नौज़वान है जो अपनी माँ के साथ रहता है लेकिन अपने पिता के बारे में नहीं जानता। उसे एक अमीर लड़की कंचन से प्रेम हो जाता है कंचन के अभिभावक भी रवि की योग्यता को देंखते हुय उसे स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन सगाई के दिन यह राज़ उजागर होता है कि वह एक कुँवारी माँ का बेटा है, उस पर पहाड़ टूट पड़ता है तथा उसकी सगाई भी टूट जाती है। रवि अपनी माँ का त्याग कर देता है।

तब वह अपने बाप से बदला लेने उसकी ख़ोज में निकलता है, दूसरे शहर में पहुँचकर लडाई-झगड़े के विवाद में फंसकर वह अदालत में पेश होता है। अदालत के न्यायाधीश शुक्ला को उसकी सारी कहानी सुनने के बाद यह आभास होता है कि रवि उन्ही का बेटा है, लेकिन वे अभी ये राज़ उसे नहीं बतलातें बल्कि उसे अपनी माँ के पास वापस जाकर पश्चाताप करने को कहते हैं, जब रवि वापस घर पहुँचता है तो पाता है कि उसकी माँ मर चुकी है। तब न्यायाधीश शुक्ला रवि को उसके पिता को ढूँढने में सहायता करने के बहाने अपने साथ ले जाते हैं।

कुछ समय पश्चात उसे सत्य का पता चलता है और वह अपनी माँ को भी ढूँढ लेता है। एक बार फिर उसके जीवन में कंचन भी वापस आ जाती है और वह दोनों विवाह के बंधन में बँध जाते हैं।

इस प्रकार एक छोटी सी सुखांत कहानी के ताने-बाने में संगीत को इस तरह पिरोया गया है कि यह कहानी संगीत के साथ चल पड़ती है और पूरी दुनिया की सैर करके सब का दिल जीत लेती है। फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बडी हिट साबित हुई। और जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि इसका संगीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ।

फिल्म ‘आए दिन बहार के’ में आशा पारेख और धर्मेंद्र पहली बार साथ नजर आए थे. इसके बाद, उन्होंने कई फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें ‘आया सावन झूम के’, ‘बंटवारा’, ‘मेरा गांव मेरा देश’ जैसी फिल्में शामिल हैं. एक्ट्रेस ने धर्मेंद्र के साथ पहली फिल्म से जुड़ा मजेदार किस्सा सुनाया और बताया कि क्यों ऋतिक रोशन के नाना और फिल्म प्रोड्यसूर जे. ओम प्रकाश एक रोमांटिक शूट से पहले टेंशन में थे!

आशा पारेख ने एक बातचीत में उन दिनों को याद किया जब वे धर्मेंद्र के साथ फिल्म ‘आए दिन बहार के’ की शूटिंग कर रही थीं. वे कहती हैं, ‘जब मैं पहली बार धर्मेंद्र के साथ फिल्म में काम कर रही थी, तब हम दोनों शूट खत्म होने के बाद अपने-अपने रास्ते निकल लेते थे.’ एक दिन जब वे एक सीक्वंस की शूटिंग के लिए दार्जलिंग जा रहे थे, तब प्रोड्यूसर ओम प्रकाश ने एक्ट्रेस को बताया कि वह काफी तनाव में हैं. आशा ने जब उनके तनाव की वजह के बारे में पूछा, तो प्रोड्यूसर बोले, ‘आप दोनों शूट के बाद अलग-अलग रास्ते चले जाते हो, तो फिर साथ में रोमांटिक सीन कैसे शूट करोगे?’

आशा पारेख ने ओम प्रकाश को भरोसा दिलाया कि वे सीन को अच्छे से शूट कर लेंगे, हालांकि प्रोड्यूसर एक्ट्रेस से बार-बार कहते रहे कि उन्हें धर्मेंद्र से बात करनी चाहिए, ताकि उनका तनाव कम हो जाए. एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्यों मेल एक्टर्स उनसे डरे-सहमे रहते थे, तो आशा पारेख कहती हैं, ‘शायद मेरी शक्ल ही ऐसी थी कि लोग मुझसे डरते थे. वे घबराते थे और मुझसे बात करने से कतराते थे.’ हालांकि बाद में धर्मेंद्र ने आशा पारेख के साथ कई शानदार फिल्में की हैं.

 आशा पारेख ने किसी इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां काफी सख्त थीं, जिसकी वजह से मेल एक्टर उनसे दूर रहते थे. मशहूर एक्टर जीतेंद्र भी सेट पर उनके साथ बात करने से कतराते थे. ‘तीसरी मंजिल’ की एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि जीतेंद्र और वह अपनी पहली फिल्म के सेट पर बात नहीं करते थे. वे कहती हैं, ‘मुझे वह दिन याद हैं जब मैं जीतेंद्र के साथ काम कर रही थीं. मैं अपना शॉट देकर बाहर चली जाती थी और फिर जीतेंद्र आते थे और अपना शॉट देकर चले जाते थे. उनके जाने के बाद मैं अपना शॉट देने के लिए लौटती थी. ऐसा कई बार हुआ, लेकिन जब हमें एक साथ शॉट देना पड़ा था, तो हमारे बीच बातें होने लगीं. फिर धीरे-धीरे चीजें सामान्य हो गई।


यह थी फिल्म आए दिन बहार के बारे में कुछ रोचक जानकारी। इसे आपके लिए फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट ने प्रस्तुत किया फिल्मी बातें के अंतर्गत । इसे आप सुन रहे थे सीमा शाही के साथ ।

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