Thursday 12 2024

आनलाइन परीक्षा प्रणाली भ्रष्ट प्रणाली है ---------------------

 आनलाइन परीक्षा प्रणाली भ्रष्ट प्रणाली है 

---------------------


 दैनिक भास्कर, पटना के 15 नवंबर 2024 के अंक में प्रकाशित समाचार कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में बैठने के लिए अभ्यर्थियों से 10-10 लाख की दलाली खाने वाला समाचार छपा है। इस समाचार के पश्चात पुलिस के द्वारा कुछ धर पकड़ की कार्यवाही करने का भी समाचार मिला है। इस संपूर्ण मामले में अगर देखा जाए तो सरकार की ओर से इस व्यवस्था में सुधार के लिए की गई किसी भी कार्यवाही के बारे में अब तक कुछ भी पता नहीं चलता। ऐसा नहीं है कि यह पहला समाचार है । इसके पहले भी केवल कर्मचारी चयन आयोग ही नहीं बल्कि सभी चयन अयोगों सहित ऑनलाइन होने वाली ज्यादातर परीक्षाओं में इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती रही है। पिछले दिनों मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट ) और इंजीनियरिंग में प्रवेश की परीक्षाओं में हुआ शोर शराबा किसी निर्णय तक नहीं पहुंचा। समय बीत गया लोग बातें भूल गए। इन परीक्षाओं का सीधा-सीधा मतलब यह है कि परीक्षा केंद्र संचालकों द्वारा मिली भगत करके इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। लेकिन यह बात आश्चर्य में डालती है कि सरकार इसको गलत मानकर इसमें ना किसी सुधार के लिए आगे आना चाहती है और ना ही परीक्षा केंद्र संचालकों के प्रति कोई ठोस कार्यवाही करती हुई दिखती है। सारी चिंता केवल परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के चेहरे पर दिखाई देती है क्योंकि भविष्य तो उन्हीं का नष्ट हो रहा है। कुर्सी पर बैठे लोग या तो काम नहीं करना चाहते और या तो इस व्यवस्था अथवा अव्यवस्था जो भी नाम दिया जाए इससे उनको कोई लाभ प्राप्त हो रहा हैं इसलिए वह स्वयं  किसी भी प्रकार के सुधार की बात करना नहीं चाहते। यह बात हर व्यक्ति को स्पष्ट रूप से मान लेना चाहिए कि इसमें नौकरी देने वाली एजेंसियों का ही हित छुपा हुआ है।  वह परीक्षाएं ऑनलाइन इसलिए कराती है  ताकि उनकी दुकानदारी चलती रहे। 

यहां यह ध्यान रखना आवश्यक है कि तकनीक का उपयोग अगर लाभकारी है तभी उस तकनीक का प्रयोग किया जाए। यदि तकनीक का प्रयोग आवश्यक नहीं है तो  उसका प्रयोग ना किया जाए। यहां ये बात भी ध्यान दिलाना चाहूंगा कि पिछले दिनों ऑनलाइन परीक्षा के पहले की व्यवस्था में ओएमआर शीट  पर परीक्षा होती थी जिसमें किसी भी प्रकार का घपला कभी नहीं देखा गया। अगर ओएमआर शीट और ऑनलाइन परीक्षा की व्यवस्था में लगने वाले समय, श्रम और सुविधा का मूल्यांकन किया जाए तो ओएमआर शीट से परीक्षा अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और कम समय लेने वाली है । लेकिन ऑनलाइन परीक्षा से होने वाले छिपे हुए लाभ के कारण सरकार   ओएमआर शीट को नहीं लाना चाहती। दूसरी बात यह भी है कि भले ही ऑनलाइन परीक्षा थोड़ी अधिक सुविधा देती हो लेकिन यदि इस परीक्षा में इस प्रकार से हेराफेरी की जा रही है तो क्या इसे बंद नहीं कर देना चाहिए? 

परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए और परीक्षा को ईमानदार और पारदर्शी बनाने के नाम पर क्या यह देश ओएमआर शीट पर होने वाले खर्च को वहन नहीं कर सकता?   

 अगर हम ओएमआर शीट को प्रयोग कर सकते हैं तो इस प्रकार की परीक्षाओं में हर हालत में केवल ओएमआर शीट का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। परीक्षा केंद्रों के चयन और उन्हें परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया की अगर जांच की जाए तो यही मालूम चलेगा कि परीक्षा केंद्रों का चयन अपात्र लोगों को ही किया जाता है। दूसरी बात यह भी है कि अगर  परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर को किसी अन्य नेटवर्क से जोड़ने का खतरा सामने आ ही चुका है तो इस व्यवस्था को समाप्त करने के अलावा कोई अन्य रास्ता चुनना गलत होगा।

 अगर इस प्रकार की परीक्षाओं को जनता के प्रति जवाब देय बनाना है तो कंप्यूटर पर आधारित ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली से पूर्ण मुक्ति पाने की आवश्यकता है। पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए का नाम भी सामने आ रहा है। हमें यह प्रश्न पूछने की आवश्यकता पड़ेगी कि जब परीक्षा आयोजित करने के लिए लोक सेवा आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेल सेवा आयोग, रेल भर्ती परिषद सहित तमाम तरह के चयन बोर्ड पहले से अस्तित्व में हैं तो एक नए विभाग एनटीए की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कर्मचारी चयन आयोग जैसे अन्य आयोग में कर्मचारी और अधिकारियों की संख्या बढ़ाकर उनके काम को और दक्ष बनाने में सरकार को क्या समस्या हो रही है? इन सारी बातों की तह में जाने पर एक ही बात समझ में आती है की शासन प्रशासन यह बात पूरी तरह से समझता है कि अव्यवस्था फैलाने से ही मनमानी करने के रास्ते खुलते हैं और सिस्टम में जितनी भी अव्यवस्थाएं की जाती है वह केवल परीक्षा प्रणालियों को मनमाने ढंग से संचालित कर अनाप-शनाप ढंग से पैसा बनाने के लिए ही की जाती है।

 राष्ट्रीय जल समर्थन पार्टी इस मामले में ऐसा मानती है कि देश के युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए एक पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। कर्मचारी चयन आयोग, रेल भर्ती परिषद , संघ और राज्य लोक सेवा आयोग जैसी परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों को और सुदृढ़ और शक्ति संपन्न बनाकर उनसे ही कार्य लिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी जैसी एजेंसियों को किसी भी हालत में परीक्षा की जिम्मेदारी नहीं दिया जाना चाहिए।देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना और परीक्षा की व्यवस्था को संदिग्ध बनाना युवाओं के साथ धोखा है। अतः इस परीक्षा को जनता के प्रति जवाब देय, ईमानदार और पारदर्शी बनाए रखने के लिए केवल कर्मचारी चयन आयोग, लोक सेवा आयोग, रेल सेवा आयोग जैसे विभाग और एजेंसियों को ही सुदृढ़ करके उन्हें ही परीक्षाएं आयोजित करने का काम दिया जाना चाहिए। इस संबंध में एक बात और बहुत आवश्यक है कि ऑनलाइन परीक्षा के बजाय ओएमआर शीट पर परीक्षा कराया जाना अधिक सुरक्षित है। अतः सरकार को ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को बंद करके ओएमआर शीट पर ही परीक्षा आयोजित कराना चाहिए।

No comments:

Post a Comment

उसकी बात करता हूं

 मैं उसकी बात करता हूं  -------------------------------- वो एक पल जो तमाम उम्र के बाद शेष है  मैं उसी पल की बात करता हूं, मैं तुम्हारी हमारी...