Saturday 10 2024

अमरीश पुरी

 फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट के फिल्मी बातें मैं आज मशहूर चरित्र अभिनेता और खलनायक -- अमरीश पुरी!


दोस्तों नमस्कार इस अंक को लेकर हाजिर हूं मैं सीमा शाही।

एक सुदर्शन व्यक्तित्व जिसमें नायक बनने की पूरी संभावना है फिर भी उन्होंने विलेन की भूमिका अपने लिए चुना, एक खनकती हुई आवाज ,मर्दाना अंदाज , बेखौफ चमकती हुई आंखें, जिसके बोलने मात्र से दुश्मनों के कैंप में हड़कंप मच जाता था ऐसे थे फिल्मी दुनिया के खलनायक अमरीश पुरी! सिनेमा हॉल में पात्र परिचय स्क्रीन पर चल रहा हो तो अमरीश पुरी का नाम आने पर दर्शक वैसे ही तालियां बजाया करते थे जैसे फिल्म के पसंदीदा नायक का नाम आने पर तालियां बजती हैं। उनके कई संवाद दर्शक अपने व्यक्तिगत जीवन में दोहराते हुए पाए जाते हैं। मोगैंबो खुश हुआ! यह एक पसंदीदा चुहल रही है जो प्राय: हंसी मजाक में लोग दोहरा ही देते हैं। अच्छाई पर बुराई का प्रतीक के हमारे देश की सभी कहानियों में उन्होंने बुराई का प्रतीक बनकर, बुराई को हद से आगे बढ़कर जाते हुए दिखाया तो वही उसकी हार को भी इस तरह जनता में रखा और यह बताने की कोशिश की कि कितना बुरा अंजाम बुराई का हो सकता है! उनकी भूमिकाओं की सफलता का यह मुकाम है कि अगर खलनायक का नाम आता है तो अमरीश पुरी का नाम आता है! फिल्मों में विलेन के चरित्र को ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को हुआ था । उनके बड़े भाई मदन पुरी फिल्मों के एक चर्चित चरित्र अभिनेता रहे हैं।


अपने करियर के आरंभ में अमरीश पुरी ने

अभिनेता के रूप में निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बनाई। उसके बाद खलनायक के रूप में उन्हें प्रसिद्धि मिली। उन्होंने 1984 में बनी स्टीवेन स्पीलबर्ग की "इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम" अंग्रेजी फिल्म में मोलाराम की भूमिका निभाई जो काफ़ी चर्चित रही। इस भूमिका का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने हमेशा अपना सिर मुँडा कर रहने का फ़ैसला किया। इस कारण उन्हें खलनायक की ही भूमिकाएं मिलने लगी। व्यवसायिक फिल्मों में प्रमुखता से काम करने के बावज़ूद समानांतर या अलग हट कर बनने वाली फ़िल्मों के प्रति उनका प्रेम बना रहा और वे इस तरह की फ़िल्मों से भी जुड़े रहे। फिर आया खलनायक की भूमिकाओं से हटकर चरित्र अभिनेता की भूमिकाओं वाले अमरीश पुरी का दौर। और इस दौर में भी उन्होंने अपनी अभिनय कला का जादू कम नहीं होने दिया फ़िल्म मिस्टर इंडिया के एक संवाद "मोगैम्बो खुश हुआ" किसी व्यक्ति का खलनायक वाला रूप सामने लाता है तो फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे का संवाद "जा सिमरन जा - जी ले अपनी ज़िन्दगी" व्यक्ति का वह रूप सामने लाता है जो खलनायक के परिवर्तित हृदय का द्योतक है। इस तरह हम पाते है कि अमरीश पुरी भारतीय जनमानस के नायकत्व और खलनायक दोनों पक्षों को व्यक्त करने के लिए याद किये जाते है।


अमरीश पुरी ने सदी की सबसे बड़ी फिल्मों में कार्य किया। उनके द्वारा शाहरुख खान की हिट फिल्म "दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे" में निभाये गए "बाबूजी" के किरदार की भूमिका को बहुत पहचान मिली और दर्शकों की तालियां भी मिली। उन्होंने मुख्यतः फिल्मों में विलेन का पात्र ही निभाए हैं।


1987 में बनी अनिल कपूर की मिस्टर इंडिया में उन्होंने "मोगैम्बो" का किरदार निभाया जो कि फिल्म का मुख्य खलनायक है। इसी फिल्म में अमरीश पुरी का डायलॉग "मोगैम्बो खुश हुआ" फिल्म-जगत मेंं प्रसिद्ध है।


अमरीश पुरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब से की। उसके बाद वह शिमला चले गए। शिमला के बी एम कॉलेज(B.M.College ) से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में वह रंगमंच से लगाव होने के कारण बड़े-बड़े रंगमंच के निर्देशकों और कलाकारों के संपर्क में रहकर नाटकों में भाग लिया। रंगमंच से उनको बहुत लगाव था। एक समय ऐसा था जब अटल बिहारी वाजपेयी और स्व. इंदिरा गांधी जैसी हस्तियां उनके नाटकों को देखा करती थीं। पद्म विभूषण रंगकर्मी अब्राहम अल्काजी से 1961 में हुई ऐतिहासिक मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे बाद में भारतीय रंगमंच के प्रख्यात कलाकार बन गए।

अमरीश पुरी ने 1960 के दशक में रंगमंच की दुनिया से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। उन्होंने सत्यदेव दुबे और गिरीश कर्नाड के लिखे नाटकों में प्रस्तुतियां दीं। रंगमंच पर बेहतर प्रस्तुति के लिए उन्हें 1979 में संगीत नाटक अकादमी की तरफ से पुरस्कार दिया गया, जो उनके अभिनय कॅरियर का पहला बड़ा पुरस्कार था।

अमरीश पुरी फिर थिएटर के रास्ते फिल्मी दुनिया की ओर मुड़ गए और उन्होंने साल 1971 में फ़िल्मी करियर की शुरुआत की । उनकी पहली फिल्म थी‘प्रेम पुजारी’। अमरीश पुरी को हिंदी सिनेमा में स्थापित होने में थोड़ा वक्त जरूर लगा, लेकिन फिर कामयाबी उनके कदम चूमती गयी। 1980 के दशक में उन्होंने बतौर खलनायक कई बड़ी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। 1987 में शेखर कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया में मोगैंबो की भूमिका के जरिए वे सभी के जेहन में छा गए। 1990 के दशक में उन्होंने ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ‘घायल’ और ‘विरासत’ में अपनी सकारात्मक भूमिका के जरिए दर्शकों का दिल जीत लिया।


अमरीश पुरी ने हिंदी के अलावा कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों तथा हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया। उन्होंने अपने पूरे कॅरियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। अमरीश पुरी के अभिनय से सजी कुछ मशहूर फिल्मों में 'निशांत', 'गांधी', 'कुली', 'नगीना', 'राम लखन', 'त्रिदेव', 'फूल और कांटे', 'विश्वात्मा', 'दामिनी', 'करण अर्जुन', 'कोयला' आदि शामिल हैं। दर्शक उनकी खलनायक वाली भूमिकाओं को देखने के लिए बेहद उत्‍साहित रहते थे।


उनके जीवन की अंतिम फिल्‍म 'किसना' थी जो उनके निधन के बाद वर्ष 2005 में रिलीज़ हुई। उन्‍होंने कई विदेशी फिल्‍मों में भी काम किया। उन्‍होंने इंटरनेशनल फिल्‍म 'गांधी' में 'खान' की भूमिका निभाई थी जिसके लिए उनकी खूब तारीफ हुई थी। गया। उनके अचानक हुए इस निधन से बॉलीवुड के साथ-साथ पूरा देश शोक में डूब गया था। आज अमरीश पुरी इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी यादें आज भी फिल्मों के माध्यम से हमारे दिल में बसी हैं।

जैसा कि हमने पहले ही बताया आपको की अमरीश पुरी के फिल्मी करियर में कुल मिलाकर 400 से अधिक फिल्में है। जिनमें से हिट सुपरहिट फिल्मों की भी संख्या काम नहीं है। इन फिल्मों के नाम लेने की बात आए तो सूची खत्म नहीं होती लेकिन फिर भी कुछ बहुत महत्वपूर्ण फिल्में है जिनका इस मौके पर नाम लेना तो बनता है। ऐसी कुछ फिल्मों के नाम है

कच्ची सड़क ,

मुम्बई एक्सप्रेस  

 मुझसे शादी करोगी  

 ऐतराज़, गर्व, हलचल 

 अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, लक्ष्य 

 टार्ज़न: द वण्डर कार  

 खुशी, दिल परदेसी हो गया, सूर्या: द हीरो , 

जाल, आउट ऑफ कन्ट्रोल , शरारत ,

बधाई हो बधाई,

जानीदुश्मन,नायक,ग़दर मुझे कुछ कहना है ,

चोरी चोरी चुपकेचुपके  

ज़ुबेदा , ऑन विंग्स ऑफ फायर ,ढ़ाई अक्षर प्रेम के , बादल ,मोहब्बतें  

सलाखें ,बारूद  

 डोली सजा के रखना  

 झूठ बोले कौआ काटे  

 चाइना गेट, परदेस , कोयला, विरासत  

सरदारी बेगम ,घातक, दिलजले ,गुंडाराज 

दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे  

करन अर्जुन,संग्राम , सूरज का सातवाँ घोड़ा, दामिनी ,वंश तहलका , विश्वात्मा,कोहराम,

सौदागर अज़ूबा , जिगरवाला  

 फूल और काँटे  

 त्रिनेत्र ,घायल,आज का अर्जुन ,निगाहें,त्रिदेव ज़ुर्रत,नाइंसाफी 

इलाका,कमांडो ,लोहा,मिस्टर इण्डिया  

तमस ,नगीना और सलाखें इत्यादि। फिल्मों की इतनी बड़ी स्थिति कि उनका नाम लेते-लेते शाम हो जाएगी ऐसे थे हिंदी सिनेमा के सुपर खलनायक चरित्र अभिनेता अमरीश पुरी। 

अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष के उम्र में ब्रेन ट्यूमर की वजह से निधन हो गया । हमारा चहेता कलाकार हम सबसे जुदा हो गया। पीछे छोड़ गया एक बहुत बड़ा शून्य लंबा सन्नाटा। फिल्मी दुनिया में अभी भी मोगंबो की सीट खाली है । क्या जाने कब कोई कलाकार आएगा जब उस मुकाम पर फिर कोई झंडा लहराएगा! फिल्मी दुनिया के नायाब सितारे चरित्र अभिनेता और खलनायक हम आपको बहुत याद करेंगे ! बहुत- बहुत याद करेंगे। 



फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट के फिल्मी बातें के अंतर्गत आज आप मशहूर चरित्र अभिनेता और विलेन अमरीश पुरी के फिल्मी करियर का सफरनामा सुन रहे थे। आज का अंक यही तक। आगे हम फिर किसी नायक, खलनायक नायिका ,चरित्र अभिनेता के फिल्मी सफर या किसी फिल्म की समीक्षा लेकर फिर आपके साथ होंगे। तब तक के लिए मुझे, यानी सीमाशाही को अनुमति दीजिए नमस्कार।

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