फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की फिल्मी बातें आज होंगी देशभक्ति पर आधारित फिल्मी गीतों पर ।
स्वीकार कीजिए सीमा शाही का जय हिंद!
दोस्तों,
यह भारत की जमीन है। यहां शीतल मंद सुगंध समीर बहती है। ये धरती सोना उगलती है, फूल खिलते हैं, फलों में मिठास होती है, घरों में रंगोली, पर्व त्यौहार, नाचना गाना चलता रहता है। इस जमीन की महक ही कुछ अलग है, नशा ही कुछ और है। लेकिन इस जमीन की सरहदों पर चिंगारियों का पहरा है। इन सरहदों के पार दुश्मन घुसने की जुर्रत नहीं कर सकता क्योंकि इस धरती पर कदम रखने वाले को आग से गुजरना पड़ता है। यही वह संदेश है जो हिंदी सिनेमा जगत ने पूरी दुनिया को बारहा समझाया है, बताया है। हिंदी सिनेमा में एक से एक खूबसूरत गाने लिखे गए ,एक से एक सुंदर धुने बनी और यहां की कोकिल कंठी आवाजों ने जब उन्हें अपना स्वर दिया तो पूरा समा, पूरा मौसम, पूरी धरती नाचने लगी। अब जब 15 अगस्त जश्ने आजादी का वह पर्व आ रहा है तो बहुत सारे गीत जेहन में उभरते हैं। जिधर जाओ उधर तिरंगे की लहराती पताका हमें उन गानों को गुनगुनाने का जोश भर देती है और बरबस ही मन गा उठता "है मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती"
अभी देश को आजाद हुए मात्र 20 साल ही हुए थे। इसी बीच पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री हुए। औद्योगिक युग का आरंभ था, हरित क्रांति अभी अपना रंग नहीं दिखा पाई थी। इसी बीच भारत को युद्ध भी लड़ना पड़ गया जिस कारण देश में महंगाई और अन्न की कमी पड़ गई थी। तब शास्त्री जी ने नारा दिया "जय जवान जय किसान"। इसी पृष्ठभूमि पर गीतकार इंदीवर ने ये गीत लिखा जो मनोज कुमार द्वारा फिल्म उपकार में फिल्माया गया।महेन्द्र कपूर ने अपनी दिलकश आवाज़ से इस गीत को अमर कर दिया। गीत को संगीत से सजाया है मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने। मनोज कुमार को जिन चुनिंदा फ़िल्मों की वजह से भारत कुमार कहा जाता था, उनमें उपकार भी एक थी। मनोज कुमार ने इस फ़िल्म को ख़ुद लिखा, अभिनय किया और डायरेक्ट भी किया। गीतकार इंदीवर का लिखा एक और गाना "है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं भारत की बात बताता हूं ।" यह इत्तेफाक ही है कि यह गीत भी महेंद्र कपूर के द्वारा ही गाया गया और इसे मनोज कुमार द्वारा फिल्म में उपयोग किया गया। फिल्म थी पूरब और पश्चिम। इसकी शूटिंग लंदन के एक बैंक्वेट हॉल में की गई फिल्म में दिखाया गया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस गाने को मुंबई में ही लंदन के बैंक्वेट हॉल का सेट देकर फिल्माया गया था जो कहीं से भी सेट जैसा नहीं लगता। महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर ने अपने एक संस्मरण में लिखा बताया है कि एक बार वह मनोज कुमार जी के साथ बैठे हुए थे तो मनोज कुमार जी ने हंसते हुए कहा कि मेरे पास बहुत से लोग आते हैं और यह बताते हैं कि उन्होंने लंदन में वह बैंक्विट हॉल देखा है जहां आपने वह गाना शूट किया था। वह कहते हैं कि हमने वह टेबल भी देखा है जिस पर आपने यह गाना शूट किया था। लेकिन मैं उन्हें थैंक यू कहता रहा और मन मन में मुस्कुराता रहा। आगे उन्होंने कहा कि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे लेकिन मैं तुमसे पर्सनली बताता हूं कि यह शूटिंग मुंबई में ही एक सेट पर की गई थी। ऐसी है इस गाने की कहानी और यह गाना स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस का अवसर हो पूरे दिन आपको पूरी दुनिया में भारत के चाहने वाले इस गाने को सुनते और गुनगुनाते हैं। इसी प्रकार एक बहुत प्यारा सा गीत है "नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं बोलो मेरे संग जय हिंद जय हिंद जय हिंद" यह गाना फिल्म सन ऑफ इंडिया के लिए शकील बदायूंनी ने लिखा था इसका संगीत तैयार किया था नौशाद ने और शांति माथुर मुख्य कलाकार ने कोरस के साथ इसे गया गया था । इस गाने के बोल बहुत प्यारे हैं जिन्हें बाल कलाकारों पर फिल्माया गया है और बाल मुख से यह बोल सुनकर आनंद आता है। इसकी आगे की लाइने हैं "नया है ज़माना मेरी नई है डगर
देश को बनाऊँगा मशीनों का नगर
भारत किसी से न रहेगा कहीं कम
आगे ही आगे ...
बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा
दुनिया की आँखों का तारा बनूंगा
रखूँगा ऊँचा तिरंगा हरदम
आगे ही आगे ...
भारतीय सिनेमा ने सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दशकों से राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत उद्देश्यपूर्ण फिल्में बनाई जा रही हैं। सन् 1940 की फिल्म 'बंधन' से लेकर 'द लीजेंड ऑफ भगतसिंह' तक ऐसी कई फिल्में बनी है जिन्होंने आम जनता की सुप्त देशभक्ति को जागृत करने में अपना योगदान किया है। यहाँ तक कि हमारे श्रेष्ठ देशभक्तिपूर्ण गीत भी फिल्मों से आए हैं। ये गीत आज हमारे राष्ट्रीय लोकाचार के अंग बन गए हैं।
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान वर्ष 1940 में प्रदर्शित फिल्म 'बंधन' का गीत 'चल-चल रे नौजवान/ रुकना तेरा काम नहीं चलना तेरी शान', पहला लोकप्रिय देशभक्तिपूर्ण गीत माना जाता है। इस गीत में विदेशी शासन से मुक्ति हेतु देश के युवाओं से सहयोग का अप्रत्यक्ष आह्वान किया गया था। कवि प्रदीप के इस गीत को अशोक कुमार और लीला चिटनिस ने गाया था।
वर्ष 1943 में राष्ट्रीयता की भावना अपने चरम पर थी। उस वर्ष आई फिल्म 'किस्मत' के प्रदीप लिखित एक गीत ने देश को झकझोर कर रख दिया था। वह गीत था, ' "आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है/ दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है ।' इसके संगीतकार थे अनिल बिस्वास।
स्वतंत्रता के एक वर्ष पश्चात आई फिल्म 'शहीद' के गीत 'वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो" ने खलबली मचा दी थी। इसे लिखा था राजा मेहँदी अली खाँ ने। मोहम्मद रफी और खान मस्ताना ने इसे गाया था। धुन बनाई थी गुलाम हैदर ने।
1954 में 'जागृति नामक बच्चों की फिल्म आई। इस फिल्म के गीत आज भी सुने जाते हैं। वे हैं-
' हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के' और 'आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिन्दुस्तान की, इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की' । सभी गीत प्रदीप ने लिखे थे और संगीतकार थे हेमंत कुमार।
वर्ष 1956 में आई
राजकपूर की बाल फिल्म 'अब दिल्ली दूर नही का गीत- 'ये चमन हमारा अपना है इस देश पे अपना राज है मत कहो कि सर पर टोपी है कहो सर पर हमारे ताज है" आज भी लोकप्रिय है। इसे गाया था आशा भोंसले ने और संगीतकार थे दत्ताराम।
1957 में बनी फिल्म 'नया दौर' जिसे अब रंगीन कर फिर प्रदर्शित किया गया है । इसमें मस्ती भरा गीत 'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का' काफी लोकप्रिय है। इसे मो रफी और बलबीर ने गाया था। इसके गीतकार थे साहिर लुधियानवी।
संगीत निर्देशक नौशाद और गीतकार शकील बदायूँनी का गीत हम कैसे भूल सकते हैं- 'इंसाफ की डगर पे बच्चों दिखाओ चल के ..
भारतीय सिनेमा में युद्ध की पृष्ठभूमि पर अनेक फिल्में बनी हैं। फिल्म 'हकीकत' (1964) भारत-चीन युद्ध पर आधारित थी। इसका गीत 'कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियो ं, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो ं देशभक्ति के जज्बे को बखूबी उभारता है। इसके गीतकार थे कैफी आजमी।
बीते जमाने के कुछ और यादगार गीत हैं- 'जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा फिल्म सिकंदर-ए-आजम 'ऐ वतन-ऐ वतन तुझको मेरी कसम' फिल्म प्रेम पुजारी 'ऐ मेरे प्यारे वत न, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझपे दिल कुरबान फिल्म काबुलीवाला और 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा फिल्म हिन्दुस्तान हमारा।
एक ऐसा गीत है जो किसी फिल्म में नहीं फिल्माया गया, लेकिन लोकप्रियता की पायदान पर शीर्ष पर है। वह गीत है ऐ मेरे वतन के लोगो ं, जरा आँख में भर लो पानी । इसे लता मंगेशकर ने अपनी दर्दभरी आवाज में हजारों दर्शकों के बीच पंडित नेहरू के समक्ष गाया था। इसे लिखा था प्रदीप ने और संगीतकार थे सी. रामचंद्र।
पिछले कुछ दशकों से आतंकवाद, सांप्रदायिक दंगे, भ्रष्टाचार और ओछी राजनीति देश के विकास की राह में रोड़ा बने हुए हैं। इन्हें केंद्र में रखकर कई सार्थक फिल्में बनी हैं। लेकिन इन फिल्मों का कोई भी गीत पुराने गीतों जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाया।
फिर भी इन फिल्मों के लोकप्रिय गीत हैं- 'दिल दिया है जाँ भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए फिल्म कर्मा, 'भारत हमको जान से प्यारा है' फिल्म रोजा, 'वतन वालों वतन ना बेच देना फिल्म इंडियन और 'जिंदगी मौत ना बन जाए संभालो यारो फिल्म सरफरोश। युद्ध आधारित फिल्म 'बॉर्डर' का गीत 'हिन्दुस्तान-हिन्दुस्तान... मेरी आन, मेरी शान, मेरी जान हिन्दुस्तान' भी उल्लेखनीय हैं।
' मेरा रंग दे बसंती चोला ' सरफरोशी की तमन्ना' और 'पगड़ी संभाल जट्टा ऐसे गीत है ं, जो तीन फिल्मों में थोड़े फेरबदल के साथ लिए गए हैं। वे फिल्में हैं- शहीद (1965) / द लीजेंड ऑफ भगतसिंह (2002) और 23 मार्च 1931 शहीद (2002)। द लीजेंड ऑफ भगतसिंह का गीत 'देश मेरे देश मेरे मेरी जान है तू अपेक्षाकृत बेहतर गीत है।
पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के साथ भारतीय सिनेमा में देशभक्तिपूर्ण हल्के-फुल्के गीतों को जगह मिली है। 'ईस्ट या वेस्ट इंडिया इज द बेस्ट' फिल्म जुड़वाँ, 'ये दुनिया इक दुल्हन.... आय लव माय इंडिया फिल्म परदेस और 'जहाँ पाँव में पायल... इट हैपन्स ओनली इन इंडिया परदेसी बाबू कुछ ऐसे ही गीत हैं।
उम्मीद है कि भारतीय सिनेमा इसी तरह अपनी फिल्मों और गीतों के माध्यम से देशभक्ति की अलख जगाए रखेगा।
ये था फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट का आज की फिल्मी बातें।
अब सीमा शाही को अनुमति दीजिए, अगली कड़ी में कुछ और देशभक्ति पर आधारित फिल्मों की बातें लेकर फिर हाजिर होंगे।
तब तक के लिए जय हिंद!
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