मैंने ये जाना कि मां अपने बच्चों के प्रति बहुत ममता रखती है। बचपन में बच्चे की हर गलतियों को माफ कर के गले लगाती है। लेकिन वो स्वयं मेरे बचपन में मुझे कैसे रखती रही होगी ये देखा नहीं क्योंकि तब मैं बहुत छोटा था। अब मैं नाना भी हूं और दादा भी बन गया हूं।अब मैं अपनी बहू और बेटी को बच्चों को पालते देख रहा हूं। मैं देखता हूं कि बच्चों की जिन बदमाशियों पर गुस्से से मेरे कान से धुआं निकल जाता है और मुझे लगता है कि अब ये पिटने वाली है। लेकिन उन्हीं गलतियों पर मेरी बेटी उनको बड़े प्यार से समझाती है और उन्हें वैसी गलतियां ना करने की हिदायत दे कर गले लगा लेती है। तब मुझे मेरी मां का चेहरा ज़ेहन में उभरता है और मन भीग भीग जाता है। कभी मां के लिए कभी बेटी या बहू के लिए। मन से आवाज आती है मां तू धन्य है।तेरा कर्ज हम पर ताउम्र उधार ही रहेगा। ये ऋण कभी अदा नहीं होगा।
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