Sunday 25 2024

कविता: खो जाने का डर

 जब इंसान अपने सपनों का पीछा करते हुए 

उसे हासिल करने की खुशी से अधिक 

उसे खो देने से डरता है 

तब मंजिल के पास जाने के बजाय 

पलायन की ओर मुड़ जाता है 

लड़ने से पहले 

डर कर हार जाता है 

ये प्रकृति का नियम है 

जितना लेना है

उतनी तौल के बराबर का मूल्य भी अदा करना है 

जो हार कर डर जाए

मंजिल उसकी नहीं

 कह दो उसको कि वो अपने घर जाए।

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