Sunday 25 2024

कविता: प्रेम भाव

 कोई बहुत खूबसूरत सी बात कहने के लिए

 बहुत सुंदर शब्दों का चुनाव करके मैं 

उन शब्दों की लीक पर चलकर देखता हूं तो 

मेरे भाव जहां पहुंचे

 ऐसे लगा जैसे

 गलत पते पर भेजा हुआ कोई पत्र 

अपनी राह भटक गया हो 

मैंने फिर से सोचा

 शब्दों की लीक पर चलकर 

अगर अपनी बात कही जा सकी होती तो

 व्याकरणाचार्य पाणिनि अथवा 

 फादर कामिल बुल्के दुनिया के सबसे अच्छे

 प्रेमी रहे होते, क्योंकि 

उनके पास सबसे अधिक शब्दों का भंडार था! 

लेकिन यह भी नहीं है क्योंकि,

 सबसे सफल प्रेमी तो लैला मजनू 

शीरी फरहाद और 

सोहनी महिवाल हुए थे!! 

फिर सोचता हूं कि चलो पढ़ने वालों से ही पूछते हैं कि सिद्ध कीजिए कि दुनिया के सबसे अच्छे प्रेमी

 पाणिनि अथवा फादर कामिल बुल्के ही थे ।

लेकिन मेरे मन का संशय और अकुलाहट

 अभी भी खत्म नहीं होती 

 जिन शब्दों को मैं प्रयोग कर रहा हूं 

मैं देखता हूं कि वे शब्द मुझे 

अभी भी वहां नहीं ले जा पाए हैं

 दरस्ल मैं जहां जाना चाहता हूं।

 इस बात की बेचैनी है कि

 ये शब्द इतने लाचार आज क्यों है ?

 इसी बात से यह 

 समझ में आता है कि सृष्टि में ईश्वर की 

सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति

 शब्दों की राह अपने उच्चतम शिखर तक

 पहुंच पाने में असमर्थ क्यों है?

 शब्दों के रास्ते आदर्श प्रेम को

 आज तक 

उस तरह नहीं पा सका जिस तरह 

चंद्रमा ने चांदनी को सूरज ने किरण को पाया है !

आज शब्दों की इस लाचारी ने

 मेरे मन को एक प्रकार की लाचारी से भर दिया है और आज मैं जो कहना चाह रहा हूं 

वह शब्दों की पकड़ से बाहर है 

ये भाषा की शक्ति सामने एक चुनौती है कि

 वो कितनी भी खूबसूरत क्यों ना हो 

वह अपने मुकाम तक तब तक नहीं पहुंच सकती

 जब तक उसमें भाव ना हों!

शब्द और अर्थ के द्वंद्व में मैं आज 

कुछ समझ ना पाने की स्थिति में 

तुमसे कहता हूं कि तुम मेरे शब्दों पर मत जाना

 मैं शब्द शब्द कहूंगा

 तुम भाव भाव समझना 

हो सके तो तुम मेरी आंखों की तरफ देखना 

मेरे चेहरे को पढ़ लेना 

मेरे शब्दों पर मत जाना क्योंकि 

हो सकता है कि जब मेरा भरोसा 

शब्दों पर से उठ ही गया है तो क्या पता

 मैं तुम्हें शब्दों से वो जज्बात ना कह पाऊं 

जो शब्दों की लीक पर चलकर कह पाता 

या तुम वह बातें 

समझ ना पाओ 

और तुम भी 

अपने पते से भटके हुए 

पत्र की तरह वापस मेरे पास तक 

शब्दों के लीक पर चलकर आ न सको!

शब्दों की ये क्या लाचारी है!

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