हिंदी सिनेमा में बाबू भाई के नाम से मशहूर चरित्र अभिनेता और हास्य कलाकार परेश रावल एक बेहतरीन कलाकार और निजी जिंदगी में एक बेहतरीन इंसान हैं। उनसे मिलकर कोई भी व्यक्ति इतना प्रभावित हो जाता है कि वो बार-बार उनसे मिलना चाहेगा। फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की फिल्मी बातें- का आज का चहीता कलाकार परेश रावल ही हैं। उनकी जिंदगी और उनके सिनेमा में योगदान के कुछ छुए पहलुओं के बारे में बात करने के लिए आज हाजिर हूं मैं
सीमा शाही।
स्वीकार कीजिए मेरा प्यार भरा नमस्कार।
दोस्तों,
परेश रावल का जन्म: 30 मई, 1955 को मुंबई में हुआ था। अभिनेत्री और 1979 में मिस इंडिया चुनी गई स्वरूप सम्पत के साथ इनका विवाह हुआ। उनके विवाह की कहानी भी बहुत रोचक है।
परेश रावल और स्वरूप दोनों को ही थिएटर का बहुत शौक था। एक इंटर कॉलेज द्वारा प्रस्तुत नाटक में परेश एक्टिंग कर रहे थे। जब परेश आए तब स्वरूप गुलाबी साड़ी पहने प्ले के ब्रोशर बांट रही थीं। वो किसी और कॉलेज से थीं जो सिर्फ इसी काम के लिए यहां आई थीं।
परेश अपने दोस्त के साथ थे और उन्होंने स्वरूप को देखते ही कहा कि मैं इस लड़की से शादी करूंगा। स्वरूप ने इसे इग्नोर किया और अपना काम करती रहीं। स्वरूप का कहना है कि उसके बाद परेश ने एक साल तक उनसे बात ही नहीं की।
उस दिन उस प्ले में परेश की एक्टिंग देखकर सभी दंग रह गए थे। लोग ये सोच रहे थे कि आखिर हुआ क्या। उन्होंने खुद बैक स्टेज जाकर परेश को बधाई दी थी। परेश और स्वरूप ने डेटिंग शुरू की और उसके बाद स्वरूप के पिता ने उन्हें मिस इंडिया कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने को कहा। स्वरूप का मन नहीं था, लेकिन परेश और स्वरूप के भाई ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया।
स्वरूप स्टेज तक पहुंच तो गईं, लेकिन उन्हें लगा कि परेश के साथ सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। परेश को लगता था कि इस कॉम्पटीशन के बाद उनका रिश्ता शायद पहले जैसा नहीं रहे, लेकिन सब कुछ ठीक था।
धीरे-धीरे दोनों के करियर अच्छे होते चले गए और परेश ने स्वरूप के पिता से उनकी शादी की बात की।
बॉलीवुड शादी की एक रिपोर्ट के मुताबिक परेश और स्वरूप की शादी लक्ष्मी नारायण मंदिर में पेड़ों की छांव के बीच हुई थी। इस शादी में बहुत ज्यादा लोग नहीं थे और ये बहुत ही इंटिमेट वेडिंग थी।
दोनों ने अपनी शादी को एन्जॉय किया और दोनों का ही ये मानना था कि उनकी शादी और रिलेशनशिप की सबसे अच्छी बात यही थी कि बहुत सारे लोगों को इसके बारे में पता नहीं था। उनके दो बेटे हैं आदित्य और अनिरुद्ध।
दोनों अपने माता-पिता की तरह ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। जहां अनिरुद्ध पर्दे के पीछे एक्टिव हैं और बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर सलमान खान की फिल्म 'सुल्तान' में काम कर चुके हैं वहीं आदित्य ना सिर्फ न्यूयॉर्क से स्क्रीनप्ले की पढ़ाई कर चुके हैं बल्कि वो अवॉर्ड भी जीत चुके हैं।
आदित्य ने बतौर एक्टर भी अपनी पारी शुरू कर दी है और वो अनुराग कश्यप की फिल्म 'बमफाड़' में दिख चुके हैं जिसे जी 5 में देखा जा सकता है।
परेश रावल की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है जहां वो खुद 'हाउ आई मेट योर मदर' जैसे किसी सीरियल की स्क्रिप्ट लिख सकते हैं।
हिंदी सिनेमा में परेश रावल के योगदान के लिए उन्हें वर्ष
2014 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। कई फिल्मों में सहनायक के रूप में अभिनय के लिए उन्हें वर्ष 1994 में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन और लीड रोल के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया जा चुके हैं।
परेश रावल केतन मेहता की फ़िल्म "सरदार" में स्वतंत्रता सेनानी वल्लभभाई पटेल की मुख्य किरदार में नजर आए थे।
परेश रावल ने अभिनय की शुरूआत 1984 में की थी। तब यह "होली" नामक फ़िल्म में एक सहायक किरदार निभाया था। इसके बाद 1986 में "नाम" फ़िल्म से उनके अभिनय का गुण लोगों को पता चला। वो1980 से 1990 के मध्य 100 से अधिक फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका में नजर आए। इसमें कब्जा, किंग अंकल, राम लखन, दौड़, बाज़ी और कई फ़िल्में शामिल है।
परेश रावल एक हास्य फ़िल्म अंदाज़ अपना अपना में पहली बार दो किरदार में नजर आए। इसके बाद वर्ष 2000 में एक हिन्दी फ़िल्म "हेरा फेरी" में अपने अभिनय और किरदार के कारण काफी प्रशंसा अर्जित की। इसके बाद वो कई फ़िल्मों में मुख्य किरदार भी निभा चूकें हैं। हेरा फेरी फ़िल्म में राजू और श्याम जिसका रोल क्रमशः अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी उनके घर में किराए पर रहते हैं। जबकि परेश रावल जो कि बाबूराव गणपत् राव आप्टे की भूमिका में थे उसमें घर में मालिक का किरदार निभाते हैं। इस किरदार को हेरा फेरी के सफलता का श्रेय दिया गया है। इसमें उनके कार्य के लिए फ़िल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हास्यकार भी जीत चुके हैं। उनका बाबुराव का किरदार उसके दूसरे भाग फिर हेरा फेरी जो कि वर्ष 2006 में रिलीज हुई थी इसमें भी देखने को मिला। यह फ़िल्म भी सफल रही। रावल को सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन और लीड रोल के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुका है। परेश रावल की सबसे लोकप्रिय और वाणिज्यिक सफल तेलुगु फिल्में हैं "क्षणाशन" "मनी मनी" "गोविंदा गोविंदा" " बावागरु" "बागुनारा" "एमबीबीएस" और "टीन मार" इत्यादि । बॉक्स ऑफिस सुपरहिट उनकी कुछ फिल्मों के नाम है अंदाज अपना अपना, चाची 420, हेरा फेरी, नायक ,आंदोलन, आवारा पागल दीवाना, हंगामा, गरम मसाला, फिर हेरा फेरी, चुप चुप के, मालामाल वीकली, वेलकम, मेरे बाप पहले आप ,ओए लकी लकी ओए, दे दना दन , अतिथि तुम कब जाओगे, रेड्डी ,ओएमजी वेलकम बैक, टाइगर जिंदा है आदि।
उनकी वर्ष 2012 में आयी फिल्म "ओह माई गॉड" में काँजीलाल मेहता के रूप में उनका किरदार आज भी अविस्मरणीय है। फिल्म जगत में ये एक ऐसे चेहरे में गिने जाते है जिनका अभिनय चाहे किसी भी किरदार में हो फिल्म में जान डाल देता है। वर्ष 2018 में राजकुमार हिरानी की फिल्म "संजू"जो कि अभिनेता संजय दत्त की बायोपिक फिल्म है उसमें संजय दत्त के पिता के रूप में उनका साक्षात् चित्रण किया जिससे उन्होंने फिल्म में काफी प्रसिद्धि मिली ।
परेश रावल अहमदाबाद पूर्व संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए थे।
ये थी मशहूर चरित्र अभिनेता और हास्य कलाकार परेश रावल की दिलचस्प कहानी । फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट के फिल्मी बातें की यात्रा आज यही तक। अब अनुमति दीजिए सीमा शाही को।
नमस्कार
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