Friday 12 2024

मैं ईश्वर हूं

 एकोब्रह्म विश्वरूपम्

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मैं ईश्वर हूं

अहम् ब्रह्मस्मि 

जो मुझमें है

ब्रह्माण्ड में भी वही है

यत्पिंडे तद्ब्रहमांडे

ये संपूर्ण ब्रह्मांड एक है

धरती के हर कोने पर हर रोज

उसी एक का जन्म और मरण होता है

वहीं उदित और अस्त होता है

धरती पर सजे रूप,रस, गंध पुष्प और फल

वही भोग लगाता है

हवाएं उसी के बदन को प्रेम पूर्ण स्पर्श से

रिझाती हैं

धूप में दग्ध होती है उसी की देह

मेंह में वही बरसता वही भीजता है

समंदर में बादल में हवाओं में

 वही चलता गोते लगाता है

पुष्प बन स्वयं वहीं अपना श्रृंगार करता है

सुख में प्रफुल्लित वहीं है

तो दुःख के दाह में दग्ध भी वही है

वो एक मानव देह है

उसमें अस्सी बिलियन न्यूरान्स की तरह

दुनिया के हर अवयव 

न्यूरोट्रांसमीटर के जैसे हैं

मानव, पशु, पक्षी 

हर जीव जन्तु पादप पल्लव 

कीट, पतंगें, तितली ,भौंरे 

विज्ञान, अध्यात्म और सच्चाई के धरातल पर सच एक ही है

ओम्

ओम् पूर्णमस्ति

 पूर्णात पूर्णमादाय

 पूर्णमेवावशिष्यते 

ईश्वर एक है

ये संपूर्ण ब्रह्मांड एक है

पूर्ण, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, सर्वगुणसंपन्न

वो एक ही हैं

तुम, मैं,ये,वो, पूरी दुनिया

हम उसी एक के हाथ पांव हैं

एक विराट के रुप,उसी केअंग प्रत्यंग हैं

ब्रह्माण्डीय रसायन (कास्मिक रसायन) के अनुसार

समस्त ब्रह्माण्ड एक इकाई है 

तुम ईश्वर हो

मैं ईश्वर हूं

हम सब ईश्वर ही हैं।

-----मोहन धनराज

 मायापुरी कॉलोनी

 झूसी प्रयागराज

पिन- 211019

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