Sunday 14 2024

दिल के दर्पण टूटे

 रातें कुछ अंधेरी हो गई थी जिन दिनों 

चारों तरफ डर था

डर का आलम था

मेरे हाथों में कुछ अवांछित चीजें 

चिपक गई थी 

जिसके साथ रहने को अभिशप्त, मैने 

अपने दोस्तों के दरवाजे पर दस्तक दिया कुछ इस तरह कि

 उनके दिल के दर्पण दरक गए, और 

हर दर्पण में मेरी तस्वीर

 खंडित होती रही

इस तरह, हुआ कुछ यूं कि

मेरा चेहरा नहीं रहा अब 

वहां अब टूटे हुए आईने की कुछ किरचें हैं

 उनमें कुछ धुंधली सी परछाइयां हैं मेरी

मेरे दोस्तों को गम है कि 

उनके दिल के शीशे टूटे

 गम मुझको भी है कि मेरा अक्स

अब वहां नहीं होता।

मुबारक हो मेरे दोस्तों तुम्हें तुम्हारा गम

मुबारक हो मुझे भी गम मेरा 

सलामत रहो तुम यह दुआ है मेरी

 तुम दुआ करो कि मैं भी सलामत रहूं

 मिले जब कहीं तुम हम

तो आंखों में कुछ और रहे ना रहे 

बस एक चाहत रहे

मुस्कुराहट रहे।

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