लोगों का जीवन से चले जाना
बहुत सारे अर्थों के साथ
एक अर्थ यह भी रखता है कि
जिंदगी के बहुत से दरवाजे
जो उनसे निस्बत रखते थे
वो भी बंद होते चले जाते हैं ।
किसी का पता चलता है ,
किसी का पता नहीं भी चलता
किसी का पता वक्त आने पर चलता है
माता-पिता का जाना सबसे बड़ा जाना है
दुनिया के कई दरवाजे
कैसे पिता के जाने के बाद
बंद हो जाते हैं
कितने दरवाजे मां जाने के बाद
बंद हो जाते हैं ।
उन दरवाजों की चाबियां
जाने वालों के साथ चली जाती है ।
कहते हैं दुनिया बहुत बड़ी है , लेकिन
इस तरह अपनों के जिंदगी से
चले जाने के बाद दुनिया
छोटी होने लगती है।
छोटी होते होते दुनिया
इतनी छोटी हो जाती है कि
आदमी के जीवन से आनंद
गायब ही हो जाता है।
चला जाता है
हां, यह अलग बात है कि
ये दुनिया आनी जानी है
सभी जानते हैं
सभी एक दूसरे को ढांढस भी देते हैं लेकिन यह मन ही तो है
मानता कहां है ,
किसकी सुनता है !
सही बात तो ये है कि
बहुत खूबसूरत सी इस दुनिया की सुंदरता
उन अपनों से ही तो होती है
जिनके होने से सुबह में चमक
सूरज में आग , चांद में चांदनी और शीतलता होती है ,
हवाओं में संगीत होता है ,
आदमी के मन में हर्ष होता है और -
बाजुओं में ताकत !
जब सूरज से तपिश और चमक चले जाएं
रातों से चांद अपनी चांदनी लेकर
चला जाए
सुरमई रातें स्याह और डरावनी होने लगें
तब क्या सीखना सिखाना क्या ?
समझना क्या , समझाना क्या?
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