अपने राम को मैं जानता हूं
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अपने राम को मैं जानता हूं
मेरी उनकी जन्म-जन्मांतर की पहचान है
मेरे राम मुझ में रहते हैं
रिश्ता मेरा उनका आदि अनंत कल से
अयोध्या नरेश दशरथ नंदन
राम होने से पहले भी
वो मेरे राम है
दशरथ के घर जब बजी बधाई
नामकरण की बेला आई
तब तुमने ही मेरे राम का नाम उन्हें दिया वो दशरथ नंदन कहलाए
मेरा उनका रिश्ता जनम जनम का
पंचमहाभूत से निर्मित इस काया में जब-जब राम समाये
तब तब तुमने खींची मर्यादाओं की रेखा
मर्यादा ही कह कर तुमने
सीता माता को वनवास कराया
सीता के बिना राम रहे
जैसे देह निष्प्राण रहे
ऐसी कितनी मर्यादाएं कितने बंधन बांधे
लिया राम का नाम, अपने स्वारथ साधे
पिछले कई जन्म पहले की बात है
तब मैं ईसा, सरमद,सुकरात हुआ,
तब मैं हुआ कबीर
ये सिलसिला अनंत है
आगे भी चलता रहेगा
यूं ही हम जन्मते रहेंगे
उनका मेरा साथ जन्म-जन्मांतर का है जन्म-जन्मांतर से वो मेरे साथ आते रहे हैं आते रहेंगे
मेरे राम मेरे हैं
मैं उन्हें जानता हूं पहचानता हूं।
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