ख्वाब की रात
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उसने कहा
हम सूरज की तरह उगेंगे
इस उम्मीद पर मैं
सूरज की तरफ चलता रहा तमाम रात
राह में गांवों की पगडंडियां, पर्वत
नदी, जंगल नज़र आते रहे
फूलों की वादियां भी मिली
रंग-बिरंगे फूलों से सजी
हवाओं को सुवासित करती हुई
भोर का तारा मिला
उसे भी किसी का इंतजार था
कुछ दूर तक मेरे माथे का तिलक हुआ
भोर के आने के साथ
तुम्हारे आने की महक आने लगी
फिर सूरज का रथ निकला
सात घोड़ों की वल्गाएं
हाथों में पकड़े सूरज के चेहरे में
तुम मुस्कुरा उठीं
कुछ इस तरह बसर हुई आज की रात
कुछ इस तरह सहर हुई ख्वाब की रात
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