महामृत्यु की ओर
पहला कदम बन जाए
प्रेम ,
तब समझो-
आत्मा से परमात्मा के
महामिलन का महारास
होने को है ।
ऐसे मन को पुलकित
करने वाले पलों में,
ये आश्वस्ति कि -
नदी के उस पार
एक घर है
जहां वो रहती है ,
जो हर पल एक
अनंत यात्रा पर चलने के लिए
मेरी तरह
प्रतीक्षारत है।
मुझे भी
उसकी एक पुकार का
इंतजार रहता है...
एक यात्रा -
अंतर्मन की ओर उन्मुख
उसके साथ अपने
अस्तित्व की तलाश
के लिए निकलने की।
प्रकृति और पुरुष के
इस महा मिलन के
अवसर पर मौन का
तुमुल नाद है
एक निस्पंद बेचैनी है
इधर भी उधर भी-
कि तुम नदी के उस पार से इस पार
क्या सचमुच में आ पाओगी
मेरी इक पुकार पर ?
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