Tuesday 15 2024

प्रियदर्शन

 दक्षिण भारतीय भाषाओं में सफल फिल्में देने वाले पटकथा लेखक और डायरेक्टर प्रियदर्शन ने हिंदी सिनेमा में 1990 के बाद कदम रखा और मुंबई फिल्म जगत में उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की। इस पर हम आगे अपनी बात जारी रखेंगे। फेअरफ्लिक्स के फिल्मी बातों के क्रम में मैं सीमा शाही आप सबका बहुत-बहुत स्वागत और इस्तकबाल करती हूं। आप सभी को मेरा नमस्कार, आदाब और 

सत श्रीअकाल,


दोस्तों,

जैसा कि मैंने कहा कि हिंदी सिनेमा में नए युग की शुरुआत कथा लेखक और डायरेक्टर प्रियदर्शन ने 1990 के दशक में की । इसके पहले मुंबई में रोमांटिक थ्रिलर, रहस्य और रोमांच या फिर हास्य फिल्में परंपरागत रूप से बनती थी। लेकिन प्रियदर्शन ने इस प्रकार के कई थीम को मिलाकर एक फिल्म बनाया जो गंभीर भी थी, हास्य भी थी रोमांटिक भी थी और कहीं-कहीं उसमें रहस्य रोमांच और थ्रिल भी दिखाई पड़ती है। ऐसी फिल्में दर्शकों को सिनेमा हॉल तक ले जाने में बहुत कामयाब रही और अपने नए पन के कारण अच्छी कमाई करने वाली साबित हुई। एक ही दो फिल्मों के बाद हिंदी सिनेमा जगत में प्रियदर्शन ने अपना एक मुकाम बनाया, एक ऐसा मुकाम जो विरले लोगों को ही नसीब हो सकता है।

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि प्रियदर्शन सोमन नायर का जन्म 30 जनवरी, 1957 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ ।प्रियदर्शन ने सरकारी मॉडल स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा और तिरुवनंतपुरम विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम ए किया। उनके पिता, एक कॉलेज में लाइब्रेरियन थे, उन्हीं की प्रेरणा से प्रियप्रदर्शन के मन में किताबों के प्रति लगाव पैदा हुआ । कॉलेज के दिनों में प्रियदर्शन ने ऑल इंडिया रेडियो के लिए छोटे छोटे नाटक की स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया। उनकी इस कला का विकास धीरे-धीरे फिल्मों के लिए कथा और पटकथा लेखन के रूप में हो गई।उनके मित्र मोहनलाल ने

प्रियदर्शन को फिल्म उद्योग में प्रवेश का रास्ता बनाया। प्रियदर्शन ने सहायक पटकथा लेखक के रूप में काम करना शुरू किया और अंततः सफल पटकथाएं लिखने में कामयाब हुए।

प्रियदर्शन ने 1990 में अभिनेत्री लिसी से शादी की और 2016 में तलाक हो गया। उनके दो बच्चे हैं, कल्याणी और सिद्धार्थ।

प्रियदर्शन ने मुंबई में जो पहली हिंदी फिल्म बनाई उसका नाम था "मुस्कुराहट" और यह वर्ष 1992 में रिलीज हुई। लेकिन यह कोई खास चर्चा का विषय नहीं बन सकी। फिर उनकी दूसरी हिंदी फिल्म आई "गर्दिश" जो 1993 में रिलीज हुई। ये मलयालम फिल्म "किरीडम" का रीमेक थी । इस फिल्म से मुंबई के सिनेमा जगत में थोड़ी सी जुंबिश हुई क्योंकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी ठीक-ठाक प्रदर्शन कर रही थी और दर्शकों ने भी इसे पसंद किया। इसका कारण था इसकी बेहतरीन पटकथा, इसके पात्र और निश्चित तौर पर प्रियदर्शन की डायरेक्शन की स्टाइल। इस फिल्म में मुख्य किरदार थे अमरीश पुरी, जैकी श्रॉफ और डिंपल कपाड़िया। इसके बाद वर्ष 2000 में प्रदर्शित फिल्म "हेरा फेरी" ने तो हिंदी फिल्मों में धमाल सा मचा दिया। इस फिल्म में थे परेश रावल, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, तब्बू और असरानी। इस बार प्रियदर्शन की फिल्मोग्राफी की कला ने वास्तविक धमाल कर दिया। उनकी कहानी में इन किरदारों ने अपने-अपने स्टाइल से जो हास्य प्रस्तुत किया वह बिल्कुल अलग तरह का था। देखा जाए तो यह फिल्म एक गंभीर विषय को लेकर चल रही थी जबकि इसकी शैली पूरी तरह से हास्य पर आधारित थी और इसकी परिणति पुनः एक गंभीर घटना की ओर जाकर होती है और यहीं से हेरा फेरी -2 के लिए रास्ता खुल जाता है। अब तो हेरा फेरी दो भी आगई और दर्शकों के द्वारा सराही गई है। आज भी इन फिल्मों को लोग अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी रुचि से देख रहे हैं और देखा जाए तो सभी चैनलों पर इनके व्यूज बढ़ते हुए क्रम में चल रहे हैं। इसके बाद प्रियदर्शन की फिल्म हंगामा ने वर्ष 2003 में रिलीज होते ही सिनेमा स्क्रीन पर फिर हंगामा मचाया इस फिल्म को भी दर्शकों ने बहुत पसंद किया और अब तक प्रियदर्शन का नाम सिनेमा प्रेमियों की नजर में और दिल में उतर चुका था। अब लोग प्रियदर्शन की फिल्में ढूंढ ढूंढ कर देखने लगे थे। हंगामा फिल्म में परेश रावल के साथ अक्षय खन्ना, आफताब शिवदासानी, टीकू तलसानिया , सोमा आनंद, उपासना सिंह, मनोज जोशी, रज़ाक ख़ान, राजपाल यादव, शक्ति कपूर और रिमी सेन के अभिनय कौशल ने वाकई कमाल किया है। इस फिल्म के बाद तो प्रियदर्शन की धूम मच गई थी और लोग उनकी अगली फिल्म का इंतजार कर रहे थे। वर्ष 2008 में जब उनकी फिल्म भूल भुलैया प्रदर्शित हुई तो चारों तरफ प्रियदर्शन का ही डंका बज रहा था। इस फिल्म में रहस्य रोमांच के साथ-साथ हास्य का मेल बहुत अलग तरह का दृश्य प्रस्तुत करता है, तो वही दूसरी तरफ इसमें बेहतरीन संगीत भी अपना एक खास स्थान बनाने में कामयाब हुआ है।

चार दशक से अधिक के अपने फिल्म प्रोडक्शन के करियर में, प्रियदर्शन ने मलयालम, हिंदी, तमिल और तेलुगु सहित कई भारतीय भाषाओं में 95 से अधिक फिल्में निर्देशित की हैं।

प्रियदर्शन के निर्देशन में उनकी पहली मलयालम फिल्म "पूचक्कोरु मूक्कुथि" वर्ष 1984 में आई थी जो आश्चर्यजनक रूप से सफल रही। इसी से फिल्म निर्माण में उनकी तीव्र मेधा का पता चलता है। इसके बाद 1986 में "थलावट्टम" , 1988 में "चित्रम"और 1991 में "किलुक्कम" जैसी सफल फिल्में आईं। उनकी तमिल फिल्म "गोपुरा वासलिले" और तेलुगु फिल्म "निर्णयम" ने भी अच्छी पहचान बनाई।

प्रियदर्शन के बेहतरीन निर्देशन में उनकी सफल फिल्मों के लिए बहुत से पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। उनकी

"कांचीवरम" और "माराकर: अरबिकादलिंते सिमहम" फिल्मों के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2012 में पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया ।

इसके अलावा उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई अन्य उल्लेखनीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं।

पुरस्कार और सम्मान कलाकारों अथवा फिल्म से जुड़े हुए सेलिब्रिटीज के लिए उनके कद और प्रतिभा से हमारा परिचय कराते हैं तो उसके साथ ही उनके प्रशंसकों और दर्शकों के बीच उनसे उनकी अपेक्षाओं को भी बढ़ाते हैं। इन अर्थों में प्रियदर्शन से उनके दर्शकों को अभी बहुत सी उम्मीदें लगी हुई है। उन्हें इस बात का भरोसा है कि शीघ्र ही प्रियदर्शन फिर से कोई नया कमाल सिल्वर स्क्रीन पर जरूर लेकर आएंगे।

 ये थी मशहूर फिल्म कथा लेखक और निर्देशक प्रियदर्शन के जीवन और उनके कार्यों के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी। आपको ये जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके बताइएगा। चलने से पहले आपको ये याद दिलाना जरूरी है कि अगर आपको यह कार्यक्रम पसंद आ रहे हैं तो हमें लाइक और सब्सक्राइब जरूर करें। इसी के साथ मुझे अनुमति दीजिए और स्वीकार कीजिए 

सीमा शाही का नमस्कार।

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