Friday 04 2024

निरूपा राय

 दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन के साथ शशि कपूर अभिनय कर रहे थे जिसमें शशि कपूर ने पुलिस अधिकारी का रोल किया था। इसी फिल्म में एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन एक विद्रोही युवा की भूमिका में थे। अपने विद्रोही तेवर को अपनी सफलता मानते हुए अमिताभ बच्चन शशि कपूर से पूछते हैं "मेरे पास बंगला है ,गाड़ी है, बैंक बैलेंस है, तुम्हारे पास क्या है "? इस पर शशि कपूर का वह जवाब कि "मेरे पास मां है" आज भी लोगों के लिए एक यादगार संवाद के रूप में याद किया जाता है । फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट के फिल्मी बातें में आज हम मां का प्रतिरूप बन गई इसी अदाकारा निरूपा राय के जीवन के कुछ पहलुओं के बारे में बात करेंगे, जिनके बारे में लोगों के बीच बहुत कम जानकारी मिलती है।

 तो स्वीकार कीजिए 

सीमा शाही का नमस्कार ।




 दोस्तों


निरूपा राय का मूल नाम कोकिला किशोरचंद्र बुलसारा था। उनका जन्म कलवाड़ा, वलसाड , गुजरात में हुआ था । बताया जाता है कि उनकी शिक्षा दीक्षा ज्यादा नहीं हुई थी। वह मात्र चौथी क्लास तक ही पढ़ सकी थी। उनके पिता ने उनकी शादी 15 वर्ष की उम्र में कमल राय से कर दिया था । कमल राय फिल्मों में एक्टर बनने का सपना देखते थे इसलिए उनका परिवार 1945 में मुंबई शिफ्ट हो गया। उनके पति कमल राय प्राय: फिल्मों में काम ढूंढने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में जाया करते थे। इसी दौरान उन्होंने अभिनेताओं की तलाश के लिए एक विज्ञापन देखा और उसके लिए आवेदन किया और निरूपा राय से भी कहा कि वह आवेदन कर दें। यह भी संयोग था कि वो चुन ली गईं और उन्होंने 1946 में गुजराती फिल्म "रनकदेवी" से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। जब उन्होंने फिल्म उद्योग में प्रवेश किया तो उन्होंने अपना विवाहित नाम निरूपा रॉय रखा।


  उसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली हिंदी फिल्म "अमर राज" में अभिनय किया । उनकी लोकप्रिय फिल्मों में से एक "दो बीघा ज़मीन" थी जो वर्ष 1953 में आई। उन्होंने 1940 और 50 के दशक की फिल्मों में बड़े पैमाने पर पौराणिक किरदार निभाए। हर हर महादेव में उन्होंने त्रिलोक कपूर के साथ पार्वती देवी की भूमिका निभाई, जिन्होंने शिव की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। एक देवी की उनकी छवि बहुत मजबूत थी । उनकी छवि से प्रभावित होकर लोग उनके घर जाते और उनका आशीर्वाद लेते। उनके सह-कलाकारों में त्रिलोक कपूर मुख्य कलाकार थे जिनके साथ उन्होंने अठारह फिल्मों में अभिनय किया। उनके अलावा भारत भूषण , बलराज साहनी और अशोक कुमार आदि उस समय के जाने-माने कलाकार हुआ करते थे।


1970 के दशक में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर द्वारा निभाए गए किरदारों की माँ के रूप में उनकी भूमिका ने उनके नाम को एक गरीब पीड़ित माँ का पर्याय बना दिया। वर्ष 1975 मे आई फिल्म दीवार में उनकी भूमिका और माँ और बेटे के संदर्भ में इसके संवादों को क्लिच के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।


उन्होंने वैसे तो अपने फिल्मी जीवन की शुरूआत 1946 के दौरान प्रदर्शित गुजराती फिल्म "गणसुंदरी" से किया था लेकिन हिन्दी फिल्मों में जब उन्होंने कदम रखा तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ लोग वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म "हमारी मंजिल" को उनकी पहली फिल्म मानते हैं। निरूपा राॅय ने बी॰एम॰ व्यास जैसे निर्माता निर्देशक की फिल्म "रनक देवी" में 150 रूपये प्रति माह पर कार्य किया था। हालाँकि बाद में उन्हें फिल्म से हटा दिया गया था। निरूपा राॅय को जितनी भी फिल्मों में काम मिला, माॅं के किरदार के रूप में ही मिला, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप स्वीकार किया और यही उनकी सफलता का कारण बना। उन्होंने अपने करियर के दौरान 120 से अधिक फिल्मों में काम किया। हिंदी सिनेमा में एक लंबा सफरनामा तय करने के बाद उन्होंने 13 अक्टूबर 2004 को इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। 


निरूपा रॉय को सहायक अभिनेत्री के किरदार को निभाने के लिए एक बार नहीं बल्कि तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


आपको बता दें कि दर्शकों को उनका मां का किरदार बहुत पसंद आता था. इसी वजह से उन्हें उसी किरदार में ज्यादातर रखा गया।


हालांकि वह अपने निजी जीवन के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करती थी इसी वजह से उनके फैमिली बैकग्राउंड के बारे में कुछ ज्यादा अभी तक पता नहीं चला है।


 उनकी शादी के कुछ सालों के बाद में उन्हें दो बेटे हुए जिनका नाम योगेश राय और किरण रॉय रखा गया. 


  निरूपा रॉय की बहू ऊना रॉय ने अपनी सास पर दहेज लेने के आरोप लगाए और उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवा दी. बता दें कि एक्ट्रेस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उनके बेटे उन्हें टॉर्चर करते थे और तरह-तरह से परेशान करते थे। निरूपा रॉय ने ताउम्र दर-दर की ठोकरें खाई ।


 ये सब देखने के बाद में पूरी फिल्म इंडस्ट्री में इस बात की चर्चा होने लगी. 


  निरूपा रॉय के बेटे योगेश रॉय और किरण रॉय दोनों ही जायदाद के लिए एक दूसरे से लड़ा करते थे । 


हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा निरूपा राय भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन जब भी मां के किरदार का जिक्र किया जाता है तो उन्हें बराबर याद किया जाता है। अपनी दमदार अदाकारी के जरिए लोगों के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री निरूपा राय ने देवी के रूप में जो अभिनय किया था उसके कारण उनकी एक छवि "देवी" की और एक "मां"की छवि दर्शकों के दिलों पर राज करती है।




तो दोस्तों यह थी हिंदी फिल्मों में "मां" का प्रतिरूप अभिनेत्री निरूपा राय के जीवन से जुड़ी कुछ जानी अंजानी बातें जिनके बारे में जानकारी बहुत मुश्किल से मिल पाती है। फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट का फिल्मी बातें सेगमेंट आपको कैसा लगता है कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा और हमारे चैनल को लाइक और सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। अब चलते हैं। फिर मिलेंगे। तब तक के लिए -


 सीमा शाही का नमस्कार।

No comments:

Post a Comment

उसकी बात करता हूं

 मैं उसकी बात करता हूं  -------------------------------- वो एक पल जो तमाम उम्र के बाद शेष है  मैं उसी पल की बात करता हूं, मैं तुम्हारी हमारी...