Tuesday 27 2024

ड्रीम गर्ल

 बॉलीवुड की सुपरस्टार अभिनेत्री "ड्रीम गर्ल" हेमा मालिनी। फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की फिल्मी बातें में आज हम ड्रीम गर्ल की सपनीली दुनिया की सैर करने वाले हैं। तो आप भी तैयार हो जाइए हमारे साथ बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी से एक मुलाकात के लिए और स्वीकार कीजिए

 सीमा शाही का नमस्कार।

दोस्तों,

हेमा मालिनी ने अपने फिल्मी करियर का आरम्भ राज कपूर के साथ फ़िल्म 'सपनों का सौदागर' से किया।वे 'ड्रीमगर्ल' नाम से प्रसिद्ध हैं। 

उनका जन्म16 अक्टूबर 1948 में अम्मनकुड़ी, तत्कालीन मद्रास में जिसे अब चेन्नई के नाम से जाना जाता है हुआ था। इनका विवाह वर्ष 1980 में सुपरस्टार धर्मेंद्र के साथ हुआ। हेमा मालिनी की दो बेटियां हैं अहाना देओल और ईशा देओल।

अभिनय के साथ-साथ हेमा भरतनाट्यम में पारंगत हैं।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई से पूरी की। वर्ष 1961 में हेमा मालिनी को एक

लघु नाटक .पांडव वनवासम .में बतौर नर्तकी काम करने का अवसर मिला।

हेमा मालिनी बालीवुड की उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनमें सौन्दर्य और अभिनय का अनूठा संगम देखने को मिलता है। लगभग चार दशक के कैरियर में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया । 


हेमा मालिनी ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा ही था तब एक तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बाद में सत्तर के दशक में इसी निर्माता-निर्देशक ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर 1973 में गहरी चाल फिल्म का निर्माण किया।


हेमा मालिनी फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए 1968 तक संघर्ष करती रहीं लेकिन उन्हें काम नहीं मिला। जब उन्हें सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक और अभिनेता राजकपूर की फिल्म "सपनों का सौदागर" में पहली बार नायिका के रूप में काम करने का मौका मिला वो साल उनके सिने कैरियर का सुनहरा वर्ष साबित हुआ । फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल. के रूप में प्रचारित किया गया। बदकिस्मती से फिल्म टिकट खिडकी पर असफल साबित हुई लेकिन अभिनेत्री के रूप में हेमा मालिनी को दर्शकों ने खूब पसंद किया ।जया चक्रवर्ती फिल्म निर्माता थीं। घर में फिल्मी माहौल होने से हेमा मालिनी का झुकाव भी फिल्मों की ओर हो गया।  


हेमा मालिनी को पहली सफलता वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म जॉनी मेरा नाम से हासिल हुई। इसमें उनके साथ अभिनेता देवानंद मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में हेमा और देवानंद की जोड़ी को दर्शकों ने सिर आंखों पर लिया और फिल्म सुपरहिट रही। हेमा मालिनी को प्रारंभिक सफलता दिलाने में निर्माता.निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्मों का बड़ा योगदान रहा। उन्हें पहला बड़ा ब्रेक उनकी ही फिल्म अंदाज में वरू1971 में मिला। इसे महज संयोग कहा जाएगा कि निर्देशक के रूप में रमेश सिप्पी की यह पहली फिल्म थी। इस फिल्म में हेमा मालिनी ने राजेश खन्ना की प्रेयसी की भूमिका निभाई जो उनकी मौत के बाद नितांत अकेली हो जाती है। अपने इस किरदार को हेमा मालिनी ने इतनी संजीदगी से निभाया है कि दर्शक उस भूमिका को आज भी भूल नहीं पाए हैं।


वर्ष 1972 में हेमा मालिनी को रमेश सिप्पी की ही फिल्म सीता और गीता में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म की सफलता के बाद वह शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचीं। उन्हें इस फिल्म में दमदार अभिनय केलिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। रमेश सिप्पी निर्देशित फिल्म सीता और गीता में जुड.वा बहनों की कहानी थी जिनमें एक बहन ग्रामीण परिवेश में पली. बढ़ी है और डरी सहमी रहती है जबकि दूसरी तेज तर्रार युवती होती है।


हेमा मालिनी के लिए यह किरदार काफी चुनौती भरा था लेकिन उन्होंने अपने सहज अभिनय से न सिर्फ इसे अमर बना दिया बल्कि भविष्य की पीढ़ी की अभिनेत्रियों के लिए इसे उदाहरण के रूप में पेश किया। बाद में इसी से प्रेरित होकर फिल्म चालबाज का निर्माण किया गया जिसमें दोहरी भूमिका वाली बहनों का किरदार श्रीदेवी ने निभाया।


हेमा मालिनी सीता और गीता से फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंची लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के निर्माण के समय निर्देशक रमेश सिप्पी नायिका की भूमिका के लिए मुमताज का चयन करना चाहते थे लेकिन किसी कारण से वह यह फिल्म नहीं कर सकी। बाद में हेमा मालिनी को इस फिल्म में काम करने का अवसर मिला।


परदे पर हेमा मालिनी की जोड़ी धर्मेन्द्र के साथ खूब जमी। यह फिल्मी जोड़ी सबसे पहले फिल्म शराफत से चर्चा में आई। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म शोले में धर्मेन्द्र ने वीरु और हेमा मालिनी ने बसंती की भूमिका में दर्शकों का भरपूर मनोंरजन किया। हेमा और धमेन्द्र की यह जोड़ी इतनी अधिक पसंद की गई कि धर्मेन्द्र की रील लाइफ की ड्रीम गर्ल हेमामालिनी उनके रीयल लाइफ की ड्रीम गर्ल बन गईं। बाद में इस जोड़ी ने ड्रीम गर्ल चरस, आसपास, प्रतिज्ञा, राजा जानी, रजिया सुल्तान, अली बाबा चालीस चोर बगावत, आतंक,

 द बर्निंग ट्रेन, चरस, दोस्त आदि फिल्मों में एक साथ काम किया।


वर्ष 1975 हेमा मालिनी के सिने कैरियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। उस वर्ष उनकी संन्यासी, धर्मात्मा, खूशबू और प्रतिज्ञा जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुई। उसी वर्ष हेमा मालिनी को अपने प्रिय निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म शोले में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में अपने अल्हड. अंदाज से हेमा मालिनी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। फिल्म में हेमा मालिनी के संवाद उन दिनों दर्शकों की जुबान पर चढ. गए और आज भी सिने प्रेमी उन संवादों की चर्चा करते हैं।


सत्तर के दशक में हेमा मालिनी पर आरोप लगने लगे कि वह केवल ग्लैमर वाले किरदार ही निभा सकती है लेकिन उन्होंने फिल्म खुशबू ,किनारा और मीरा जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभाकर अपने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया। इस दौरान हेमा मालिनी के सौंदर्य और अभिनय का जलवा छाया हुआ था। इसी को देखते हुए निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें लेकर फिल्म .ड्रीम गर्ल का निर्माण किया।

वर्ष 1990 में हेमा मालिनी ने छोटे पर्दे की ओर भी रूख किया और धारावाहिक नुपूर का निर्देशन किया। इसके बाद वर्ष 1992 में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान को लेकर उन्होंने फिल्म "दिल आशना है" का निर्माण और निर्देशन किया। वर्ष 1995 में उन्होंने छोटे पर्दे के लिए मोहिनी का निर्माण और निर्देशन किया।


फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद हेमा मालिनी ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और राज्य सभा की सदस्य बनीं। हेमा मालिनी को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 1999 में फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से भी सम्मानित किया गया।


हेमा मालिनी ने अपने चार दशक के सिने कैरियर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया। उनकी कुछ उल्लेखनीय फिल्में हैं: सीता और गीता , प्रेम नगर,अमीर गरीब , शोले , महबूबा चरस , ड्रीम गर्ल. किनारा, त्रिशूल , मीरा , कुदरत, नसीब,क्रांति, अंधा कानून, रजिया सुल्तान , रिहाई , जमाई राजा , बागबान , वीर जारा , आदि।


वर्ष 1995 में उन्होंने अपनी दूसरी फीचर फ़िल्म मोहिनी का भी निर्माण और निर्देशन किया, जिसमें उनकी भतीजी मधु और अभिनेता सुदेश बेरी मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद उन्होंने नृत्य और टेलीविज़न के काम पर ध्यान केंद्रित किया, केवल कभी-कभार ही फ़िल्मों में दिखाई दीं। वर्ष 1997 में, उन्होंने विनोद खन्ना के प्रोडक्शन हिमालय पुत्र में अभिनय किया ।



कई सालों तक फिल्मों से ब्रेक लेने के बाद, मालिनी ने वर्ष 2003 में बागबान से वापसी की, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार के लिए नामांकन मिला। उन्होंने 2004 की फिल्म वीर-ज़ारा और 2004 की फिल्म लागा चुनरी में दाग में अतिथि भूमिकाएँ भी कीं , इसके अलावा 2006 की फिल्म बाबुल में एक सहायक भूमिका भी निभाई। 2010 में, उन्होंने साथी अनुभवी अभिनेत्री रेखा के साथ फिल्म "सदियाँ" में अभिनय किया। 2011 में, उन्होंने अपनी तीसरी फीचर फिल्म "टेल मी ओ खुदा" का निर्माण और निर्देशन किया, जिसमें उनके पति धर्मेंद्र और उनकी बेटी ईशा देओल दोनों थे, जो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। 2017 में उन्होंने ग्वालियर की विजया राजे सिंधिया की भूमिका में "एक थी रानी ऐसी भी" फिल्म में अभिनय किया यह फिल्म 21 अप्रैल 2017 को रिलीज़ हुई थी। उनकी नवीनतम फिल्म "शिमला मिर्ची" है , जिसमें राजकुमार राव और रकुल प्रीत सिंह ने अभिनय किया है । यह फिल्म भारत में 3 जनवरी 2020 को नाटकीय रूप से रिलीज़ हुई और 27 जनवरी 2020 को नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध कराई गई।


2021 में, उन्हें भारत के 52वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इंडियन फिल्म पर्सनालिटी ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया । 



वर्ष 1999 में, मालिनी ने पंजाब के गुरदासपुर में लोकसभा चुनावों में अभिनेता विनोद खन्ना के लिए प्रचार किया । 2003 से 2009 तक, उन्होंने उच्च सदन - राज्यसभा में एक सांसद के रूप में कार्य किया , उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा नामित किया गया था । लोकसभा के लिए 2014 के आम चुनावों में , मालिनी ने मथुरा लोकसभा सीट से जीत हासिल कर सांसद बनी। 


2019 के लोकसभा चुनाव में हेमा मालिनी ने मथुरा लोकसभा सीट पर फिर से जीत दर्ज की।   


2024 के लोकसभा चुनावों में, मालिनी ने एक बार फिर मथुरा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता, जिससे यह मथुरा से हैट्रिक बन गई। 


बहुमुखी प्रतिभा की धनी, प्रतिभावान अभिनेत्री और भरतनाट्यम की पारंगत नृत्यांगना ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रशंसा में कहने के लिए बहुत कुछ है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान और सामाजिक कार्यों की सूची भी बहुत लंबी है। अवसर आने पर कुछ और बातें फिर कभी। फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की फिल्मी बातें का ये अंक अब यही संपन्न होता है। अनुमति दीजिए 

सीमा शाही को 

नमस्कार।

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