यही विडंबना है सत्य की
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देखता हूं कि सत्य की ताकत को सभी जानते हैं
पहचानते हैं
इसीलिए सत्य के ठेकेदारों ने
सत्य को भगवान बनाकर मंदिरों में स्थापित कर दिया है और
हर सोमवार मंगलवार को उसकी पूजा करने जाते हैं
कुछ ठेकेदारों ने सत्य को नुमाइश बनाकर शीशे में
बंद करके रख दिया है
शनिवार रविवार उसे देखने जाते हैं
बच्चों को दिखाते हैं और तालियां बजाते हैं
कुछ लोगों ने सत्य को
अपना तकिया कलाम बना रखा है
जो अपनी हर बात करने से पहले सत्य का नाम लेते हैं
यही नहीं कुछ लोगों ने तो सत्य को कैद कर रखा है
उसे बाहर की हवा लगे भी नहीं देते
वह सत्य को जीवित तो रखते हैं लेकिन उसे अपने आचरण में कभी नहीं उतारते
सत्य तो सत्य है और अपनी शक्ति से
वह फिर भी प्रकट हो ही जाता है और
जब वह प्रकट होता है तो धरती पर भूचाल आता है
सत्ताएं बदल जाती है निजाम बदल जाते हैं
महात्मा गांधी ने सत्य को अपने जीवन में उतार लिया और वह अमर हो गए
समय बदला युग बदला और आज सत्य की यै हालत है कि
वह मंदिर में है, नुमाइश में है, कैद में है
बस हमारे जीवन में नहीं है
यही विडंबना है सत्य की !
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