रिश्तों को नींद में चलने की बीमारी है
तुम हो या मैं बचा कोई नहीं अब जैसे
इन हवाओं ही में अजब सी खुमारी है
रिश्तों को नींद में चलने की बीमारी है....
रोज मिलते हैं बात होती है
प्यार होता है रार होती है
फिर याद कुछ नहीं रहता
कोई अजब सी बेकरारी है
रिश्तों को नींद में चलने की बीमारी है...
हमसफ़र के संग हम सफर में रहे
चलते फिरते या अपने घर में रहे
हमारे बीच कोई अजनबी भी रहा
दिल मिल न सके ये कैसी यारी है
रिश्तों को नींद में चलने की बीमारी है...
हम तो तनहा हैं दिल भी तनहा हैं
जिस्म तन्हा है रूह भी तनहा हैं
शजर कोई हो दिल कहीं नहीं लगता
दिन में सुकून न मिले बेचैन रात सारी है
रिश्तों को नींद में चलने की बीमारी है..…
(चित्र साभार फेसबुक)
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