Friday 12 2024

किस्मत की बात

 ये किस्मत की बात थी -

उस जंगल के सनसनाते 

नि: शब्द अंधेरे में

एक दिव्य प्रकाश हुआ

एक मधुर संगीत बज उठा

राजा ने रानी को 

रानी ने राजा को देखा

और किसी ने किसी को नहीं देखा

तब मैंने कहा - "ये कैसे ?"

तब तुमने समझाया

जैसे तुम हो मैं हूं वैसे ही 

फिर जैसे मैं अपनी तन्हाईयों में

तुम से मिली

और मैंने तुमसे मिलकर अपने आप को

आबाद किया,

अपने वजूद को तुममें बिखेर कर

स्वयं से मुक्त हो गई

वैसे ही वो दोनों अपने आप से

 मुक्त हो गए

ऐसा कह कर तुम चली गई।

मैं रात के दो बजे 

अपने कमरे के अंधेरे से

अपने वजूद केअंधेरे में उतर गया

मैंने देखा

वहां एक परिपूर्ण स्त्री रहतीं हैं

उसके अस्तित्व के साथ

 मैं भी पूरा हो जाता हूं

मैं अकेला कभी पूर्ण पुरुष

कभी पूरी स्त्री हो जाता हूं

कोई तस्कीन सा दिला जाता है

एक सुकून भरा अंधेरा उजाला

मेरे आस-पास रहता है

सड़क पर चलती गाड़ियों के स्वर में

बारिश की टपकती बूदों में 

एक संगीत सा उभरता है

मैं अब सोचता हूं

तो देखता हूं कि कैसा विचित्र सपना है

सपना है या हकीकत है

समझ में कुछ नहीं आता 

एक सुकून सा होता है

तुम यहीं मेरे साथ साथ रहती हो

इक यकीन सा होता है!

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