Saturday 12 2023

Ganga Tera Pani Amrit.

 गंगा का पानी अमृत है। हम इसे गंगाजल कहते हैं। गंगा में नहाने से पवित्रता आती है । गंगा को हम गंगा माता भी कहते हैं। गंगा माता धरती पर जीवो के लिए वरदान है । गंगा नदी हिमालय से निकलकर मैदानों पर होते हुए हिंद महासागर में मिल जाती है । गंगा के रास्ते में बड़े-बड़े मेले लगते हैं। इन मेलों में बहुत सारे देवताओं के मंदिर बने होते हैं । यहां लोग दर्शन करने आते हैं और मेले में लगने वाली दुकानों में बच्चों के लिए खाने पीने की अच्छी अच्छी चीजें और खिलौने बिकते हैं। खिलौनों के अलावा मेले में तरह-तरह के झूले और खेलने की जगह बनाई जाती है। ।लेकिन गंगा नदी के प्रदूषण से इसके सामने खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी  का जल अब इतना प्रदूषित हो गया है कि नदी के जीव जंतु का जीवन खतरे में पड़ गया है। इसके जल में विभिन्न प्रकार की जहरीली चीजें पड़कर गंगाजल को स्वास्थ्य के लिए नुकसान देवी बना दिया है। शहरों के नाले का पानी सीधे नदी में गिरने लगा है जिसके कारण बहुत सारे केमिकल गंगाजल में मिलने लगे हैं। फैक्ट्रियों का गंदा पानी भी नदी में गिरता है । फैक्ट्रियों के पानी में भी खतरनाक केमिकल होते हैं। इनकी वजह से पानी खराब होता जा रहा है ।पहले कभी गंगा नदी का जल एकदम साफ होता था अब यह जल गंदला हो चला है ।देखने में आता है कि अक्सर लोग अपने घरों से पूजा आदि करके बची हुई सामग्री को गंगा नदी में बहा देते हैं। इसके अलावा कुछ लोग मनुष्यों के शव भी लाकर नदी में बहते हैं जिससे गंगा नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित होता जा रहा है। गंगा नदी में हर साल लगने वाले मेलों में बड़ी संख्या में लाखों लोग प्रतिदिन गंगा में नहाते हैं। यदि गंगाजल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा तो गंगा में स्नान करना मुश्किल हो जाएगा इसके अलावा इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी नष्ट हो जाएगी। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है । परिस्थितियों को अभी ठीक किया जा सकता है । आज भी अगर आप जाकर देखें तो गंगा नदी में प्रसिद्ध साइबेरियन पक्षी जाड़े के मौसम में देखने को मिलते हैं। हजारों किलोमीटर दूर से चलकर साइबेरियन पक्षी हर साल प्रयाग में आते हैं और गंगा माता की गोद में खेलते  हैं ।इस दौरान गंगा में नाव में बैठे तीर्थयात्री पक्षियों के साथ बहुत आनंद मनाते हैं। कुंभ के मेले में पूरे भारत से संत महात्मा आते हैं और अपने अपने प्रवचन से लोगों को ज्ञान का पाठ पढ़ाते हैं। ज्ञान से हमको अच्छा जीवन जीने में सहायता मिलती है। इस प्रकार गंगा में शरीर की शुद्धता के साथ-साथ मन की शुद्धता की भी बात कही जाती है। प्रयागराज में गंगा यमुना और सरस्वती का संगम है। संगम में स्नान करने से पुण्य मिलता है ।यहीं पर बड़े हनुमान जी का मंदिर है और पास में ही इलाहाबाद का किला है जिसे अकबर ने बनवाया था। इस किले में भी बहुत से मंदिर हैं जिन्हें देखने के लिए यात्री रोज पहुंचते हैं ।गंगा के पूर्वी किनारे पर झूसी स्थित है। इसको पुराणों में प्रतिष्ठान पुरी के नाम से जाना जाता है। गंगा नदी पर दो रेल पुल मेले के बीच में है और दो सड़क पुल भी हैं। इस प्रकार गंगा नदी के पूर्वी किनारे से आने वाले लोगों को इस पुल से गंगा के किनारे आने में मदद मिलती है ।कुंभ मेला के दौरान पूरे विश्व से हर धर्मों के मानने वाले और हर धर्मों के पुजारी धर्मगुरु अपने धर्म का प्रचार प्रसार करने आते हैं। यहां बहुत सी पुस्तके भी बिकती हैं ।इन पुस्तकों में तमाम तरह के धार्मिक कथानक और ज्ञान की बातें लिखी होती है । कुल मिलाकर गंगा नदी शारीरिक स्वास्थ्य और मनकी पवित्रता का संगम है। हमें गंगा को प्रदूषित होने से बचाना है । सरकार का भी ऐसा मानना है कि गंगा नदी में शवों को बहाना और गंदे पानी को डालना गलत है। गंगा में गंदगी के बजाय पाप को धोया जाए तभी गंगा का कल्याण होगा। तभी मनुष्यों का कल्याण हो सकेगा। पुराणों में कहा गया है-" गंगे तब दर्शनार्थ मुक्ति:।

मोहन धनराज

 आईबीपीएस 

सहायक निदेशक (सेवानिवृत्त)

दूरदर्शन लखनऊ


No comments:

Post a Comment

उसकी बात करता हूं

 मैं उसकी बात करता हूं  -------------------------------- वो एक पल जो तमाम उम्र के बाद शेष है  मैं उसी पल की बात करता हूं, मैं तुम्हारी हमारी...