Monday 14 2023

अपनी मां की पहचान हूं मैं

 सूरज ने मुझे जन्म लेने से अबतक

अपनी आभा के स्वर्ण से तपा तपा कर

ऐसे निखारा है कि मुझे पारस बना दिया

पिता की तरह 

हवाओं ने अपने आंचल से

मुझे छू कर ये जताया है कि मां यहीं है

मेरे आसपास 

जब से मैंने ये जाना है

उनको पहचाना है

मुझको मेरी जिंदगी आसान लगने लगी है बचपन की तरह

मेरा बचपन फिर से लौट आया है।

मैं कहीं भी जाता हूं

कोई छाया मेरे साथ साथ चलती है

जिंदगी खुद गिर कर संभलती है

रात तारों भरी हो या चांद से रौशन 

कोई प्यार की रोशनी है जो

हर हाल मे मेरी हमसफ़र है हमक़दम है।

मेरी जिंदगी का काफिला

रुखसत है अपनी मंजिल की जानिब

ये क्या है कौन है मेरा हौसला बनकर 

मेरे कानों में गीतों की मिसरी घोलता है

मेरा लल्ला है तू मेरा प्यारा है तू

कुछ ऐसा ही वो मुझसे बोलता है।

अजेय है, अजातशत्रु है तू

भूल कर भी हार ना जाना

तुम्हारे नाम की ख्वाहिश है इस दुनिया को

लिखना है तुम्हें अभी आसमां पे

अपना नाम और पहचान अपनी

क्योंकि तू सूरज है चांद है

दुनिया में एक तू ही तो है जो

मेरी पहचान है।

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