Friday 02 2024

अभिनेत्री तनुजा



साथियों , फेअरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत फिल्मी बातें लेकर मैं हाजिर हूं सीमा शाही।



आज हम बातें करेंगे सन 60 से 80 के दशक की कुछ-कुछ चर्चित कुछ गुमनाम लेकिन सिद्धहस्त अभिनेत्री तनुजा के बारे में।

कुछ-कुछ चर्चित कहने से आशय ये है कि उनकी फिल्मों के नाम के साथ उनका नाम चर्चा में हरदम रहा है लेकिन आमतौर पर फिल्मी बातचीत या किसी भी तरह की गॉसिप में या समाचार पत्रों में वह लाइमलाइट में रहने से दूर रही है। उनका स्वभाव ही ऐसा कुछ रहा है।

तनुजा मुखर्जी अपने दौर की जानी-मानी एक्ट्रेस  हैं। आपका जन्म 23 सितंबर 1943 को मुंबई में हुआ था। तनुजा की मां शोभना समर्थ भी अपने जमाने की मशहूर एक्ट्रेस थीं. तनुजा जब छोटी थीं तभी उनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो गए. 

उस समय वो स्विट्जरलैंड के सेंट जॉर्ज स्कूल में पढ़ती थीं। तब तनुजा के घर की माली हालत ठीक नहीं रही और उन्हें घर वापस आना पड़ा। उनकी मां ने उन्हें कहा कि या तो वो इसका दुख मना सकती हैं या फिर हिंदी सिनेमा में काम कर सकती हैं। यह सुनकर तनुजा ने हिंदी फिल्मों को चुना।  

 तनुजा ने अपने करियर की शुरूआत बतौर बाल कलाकार साल 1950 में आई फिल्म 'हमारी बेटी के जरिए की थी. शुरुआत में तो वे ज्यादातर अपनी मां द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्मों में ही नजर आती थीं. बतौर लीड एक्ट्रेस तनुजा पहली बार फिल्म ‘छबीली’ में नजर आईं. 1961 में आई फिल्म 'हमारी याद आएगी' उनके करियर में टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई.

हाथी मेरे साथी, बहारें फिर भी आएंगी, एक बार मुस्कुरा दो, प्रेम रोग, पैसा या प्यार, हमारी बेटी समेत कई सुपरहिट फिल्में कर चुकीं हैं।  

अभिनेत्री तनुजा मुखर्जी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। अपने दौर की बेहतरीन अदाकाराओं में शुमार तनुजा एक्ट्रेस काजोल की मां भी हैं। तनुजा खुद भी एक फिल्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती हैं. तनुजा की मां शोभना समर्थ भी एक अभिनेत्री थीं और उनके पिता प्रोड्यूसर कुमारसेन समर्थ थे।  तनुजा को 16 साल की उम्र में ही  पहली फिल्म मिल गई थी।

 फिल्म 'छबीली' के दौरान का उनका एक किस्सा काफी मशहूर है। दरअसल, फिल्म के एक सीन में तनुजा को रोना था लेकिन वो बार-बार हंस रही थीं। तनुजा ने केदार शर्मा से कहा कि आज मेरा रोने का मूड नहीं है। इसी बात से नाराज होकर केदार शर्मा ने तनुजा को जोरदार तमाचा जड़ दिया। ये देखकर पूरी टीम सन्न रह गई। तनुजा ने पूरी बात मां को बताई तो उल्टा तनुजा को एक और थप्पड़ जड़ दिया। क्योंकि वो तनुजा के व्यवहार से अच्छी तरह वाकिफ थीं। फिर शोभना, तनुजा को वापस सेट पर लेकर गईं और केदार शर्मा से कहा कि अब ये रो रही है, शूटिंग शुरू कर दीजिए। इसके बाद तनुजा ने परफेक्ट शॉट दिया।

तनुजा ने कई बंगाली फिल्में भी की हैं। वहीं तनुजा के हिसाब से बंगाली फिल्में उन्हें ज्यादा संतुष्टि देती थीं। शोमू मुखर्जी से तनुजा की मुलाकात फिल्म 'एक बार मुस्कुरा दो' के सेट पर हुई थी। दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगा और दोनों ने साल 1973 में शादी कर ली। उसके बाद दो बेटियों काजोल और तनीषा का जन्म हुआ। 10 अप्रैल 2008 को दिल का दौरा पड़ने से 64 वर्ष की आयु में शोमू का निधन हो गया।

अभिनेत्री तनुजा को वर्ष 1961 में बनी फिल्म  दीदी और 1963 में बनी मराठी फिल्म दीया नेया के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार प्रदान किए गए । इस समय उनका करियर उठान पर था। वर्ष 1960 से 1972 तक का समय उनके लिए बहुत अच्छा रहा जिसमें चांद और सूरज, बहारें फिर भी आएंगी, ज्वेल थीफ, नई रोशनी,   कदम फूल , तीन भुबन जैसी हिंदी और बंगाली फिल्मों में उनकी भूमिकाओं के लिए उन्हें जाना  जाता है। इसके पश्चात जीने की राह, राजकुमारी, हाथी मेरे साथी , अनुभव, जीवन साथी ,और दो चोर फिल्मों के नाम लिए जाते हैं जो अपने तौर पर बॉक्स ऑफिस पर अच्छी फिल्में साबित हुई। अभिनेता संजीव कुमार , उत्तम कुमार , राजेश खन्ना और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी 1960 से 1970 के दशक के अंत तक लोकप्रिय थी।

तनुजा को जासूसी फिल्म ज्वेल थीफ  में उनके प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए पहला नामांकन मिला । उनकी अगली फिल्म धर्मेंद्र के साथ इज्जत (1968) हाथी मेरे साथी (1971) की सफलता के बाद , उन्होंने दूर का राही , मेरे जीवन साथी , दो चोर और एक बार मुस्कुरा दो  काम चोर , याराना , खुद्दार और मासूम में अभिनय किया । उन्होंने जिन अन्य फिल्मों में अभिनय किया है उनमें पवित्र पापी , भूत बांग्ला और अनुभव शामिल हैं । उनकी कुछ मराठी फिल्में ज़ाकोल , उनाद मैना और पितृरून हैं ।

1960 के दशक के मध्य में, तनुजा ने कोलकाता में बंगाली फिल्मों में समानांतर करियर शुरू किया , जिसकी शुरुआत  से हुई, जिसमें उनके साथ उत्तम कुमार थे । इसके बाद उन्होंने एंथनी-फ़िरिंगी  और राजकुमारी  में काम किया। तनुजा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री सौमित्र चटर्जी के साथ थी, जिनके साथ उन्होंने तीन भुवनेर परे (1969) और प्रथम कदम फूल जैसी कुछ फ़िल्में कीं। इन बंगाली फ़िल्मों में तनुजा ने अपने संवाद खुद बोले।

इसके बाद, तनुजा ने कई सालों तक फिल्मों से संन्यास ले लिया, लेकिन जब उनकी शादी टूट गई तो वे वापस आ गईं। अब उन्हें अक्सर पूर्व नायकों द्वारा अभिनीत सहायक भूमिकाएँ दी जाने लगीं। उनके प्यार की कहानी के नायक अमिताभ बच्चन को खुद्दार (1982) में उन्हें "भाभी" कहना पड़ा। उन्होंने राज कपूर की प्रेम रोग (1982) में भी सहायक भूमिका निभाई। 1986 में, उन्हें विजया कुमारतुंगा के साथ सिंहली फिल्म पेरालीकारियो में अभिनय करने के लिए श्रीलंका से निमंत्रण मिला, जहाँ उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई। [5]


इसके बाद वह साथिया  रूल्स: प्यार का सुपरहिट फॉर्मूला  और खाकी  जैसी फिल्मों में सहायक अभिनेत्री के रूप में नजर आईं। 2008 में, तनुजा ने अपनी बेटी काजोल और दामाद अजय देवगन के साथ ज़ी टीवी की पारिवारिक डांस सीरीज़ रॉक-एन-रोल फ़ैमिली में जज की भूमिका निभाई। 2013 में, तनुजा ने नितीश भारद्वाज द्वारा बनाई गई मराठी फ़िल्म पितृरूण में एक विधवा का किरदार निभाया । विधवा की भूमिका के लिए, तनुजा ने अपने किरदार को प्रामाणिक बनाने के लिए अपना सिर मुंडवा लिया है।

यह थी अभिनेत्री तनुजा जिनकी मां फिल्म अभिनेत्री ठीक और उनकी अपनी बेटी ने भी अभिनय के क्षेत्र को करियर के लिए चुनाव इस प्रकार इस परिवार की तीन पीढियां का संबद्ध फ़िल्मी दुनिया से हो चुका है और हो सकता है कि भविष्य में भी यह परिवार हिंदी सिनेमा के लिए अपना योगदान देता रहेगा।


 हम फेयरफ्लिक्स एंटरटेनमेंट की तरफ से अभिनेत्री तनुजा को उनके योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। 


इसी के साथ संपन्न होता है आज की फिल्मी बातें। दोस्तों, हमारे चैनल को लाइक और सब्सक्राइब करके आगे बढ़ाने में हमारी सहायता करते रहे और अब मुझे यानी अपनी दोस्त सीमा शाही को अनुमति दीजिए।

 नमस्कार।

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